सिगरेट का धुआं, खून से लथपथ चेहरा…ईरान में हिजाब आजादी का परचम बनकर लहरा रहा

ईरान की औरतें कहीं खामेनेई की तस्वीर जला कर तमाम बंधनों को सिगरेट के धुएं में उड़ाती नजर आ रही हैं, कहीं खून से लथपथ चेहरे के साथ बेड़ियों से आजादी की मांग कर रही हैं. वो एक नया इतिहास लिख रही हैं. हिम्‍मत और फौलादी इरादों के साथ विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही हैं.

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  • ईरान में महिलाओं ने हिजाब विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए अपने अधिकारों और आजादी की आवाज बुलंद की है.
  • औरतें कहीं खामेनेई की तस्वीर जला रही हैं, कहीं खून से लथपथ चेहरे के साथ बेड़ियों से आजादी की मांग कर रही हैं.
  • ईरान के निष्कासित राजकुमार रजा पहलवी ने विरोध को हवा दी है और उनके पीछे अब अमेरिका की ताकत है.
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ईरान की सड़कों पर हिजाब आजादी का परचम बन कर लहरा रहा है. औरतें इतिहास रच रही हैं. कहीं गिरफ्तारी देकर, कहीं घायल होकर, कभी हिजाब उतारकर और कभी सिगरेट के धुएं में मर्दों की थोपी हुई बंदिशों को जलाते हुए वो अपनो कहानी खुद लिखने की जिद पर अड़ी हैं. हाल के दिनों में ईरान की सुप्रीम लीडरशिप जनता के सबसे सख्‍त विरोध का सामना कर रही है. पूरे मुल्क में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और खामेनेई प्रशासन के खिलाफ लोगों का गुस्सा उबाल पर है. शहर-शहर सड़कों पर हकूमत के खिलाफ बगावत की आवाज है, लेकिन जो सबसे खास बात है, वो ये है कि इस बगावत का का चेहरा बनी हैं ईरान की औरतें.

औरतें कहीं खामेनेई की तस्वीर जला कर तमाम बंधनों को सिगरेट के धुएं में उड़ाती नजर आ रही हैं, कहीं खून से लथपथ चेहरे के साथ बेड़ियों से आजादी की मांग कर रही हैं. वो एक नया इतिहास लिख रही हैं. वो हिम्‍मत और फौलादी इरादों के साथ विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रही हैं, अपने अधिकारों, पहचान और सम्मान की आवाज बुलंद कर रही हैं. साथ ही जन, जिंदगी, आजादी के नारे लगा रहीं हैं.

रजा पहलवी के पीछे अमेरिकी ताकत

इस विरोध की आग को ईरान के निष्कासित राजकुमार रजा पहलवी ने हवा दी है. पहलवी के पिता इस्लामिक क्रांति के कुछ ही पहले देश छोड़कर निकल गए थे. रजा पहलवी के पीछे अब अमेरिका की ताकत है और राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान के खिलाफ कार्यवाही की चेतावनी ईरान पर तलवार की तरह लटक रही है. हालांकि हालिया विरोध की जड़ में है फैलती आर्थिक बदहाली, लेकिन सालों से सख्‍त इस्लामी कानूनों के खिलाफ उठती महिलाओं की आवाज ने इस विरोध को और दमदार बना दिया है.

इस विरोध को जब ईरान की हुकूमत दबाने की कोशिश में है तो एक बुजुर्ग महिला का विरोध करता और नारे लगाता वीडियो वायरल हो रहा है. चेहरे पर शायद खून है, या फिर ध्यान खींचने के लिए इस्तेमाल किया गया कोई पेंट, जो भी हो संदेश साफ है. वो कह रही है कि अब बहुत हो चुका है. मुझे मौत का खौफ नहीं है. मैं 49 सालों से मर रही हूं.

महिलाएं बुलंद कर रहीं बगावत का झंडा

ये चेहरा और ये आवाज एक बार फिर ईरान के लोगों की बगावत का प्रतीक बन गई है. विरोध फैल रहा है और इसकी पहली कतार में खड़ी हैं महिलाएं, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को सीधे चुनौती देती हुई.

सालों की बेड़ियों के खिलाफ जब औरतों ने आवाज बुलंद की तो खामेनेई की तस्वीर को जला डाला गया, उस आग से सिगरेट जलाई. ऐसा करके इन औरतों ने दोहरा संदेश दिया और दो पाबंदियों को नकारा, सुप्रीम लीडर की तस्वीर जलाना और औरतों का सिगरेट पीना दोनों ही मना है. इसे नकार कर वो कानून तोड़ रही हैं और सत्ता में बैठे हुक्मरानों को चुनौती दे रही हैं.

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यूनिवर्सिटी कैंपस हो या बाजार , हिजाब के कानून के खिलाफ, बेरोजगारी के खिलाफ और तानाशाही के खिलाफ सबसे बुलंद आवाज औरतों की है और ये एक बड़ा बदलाव है.

जान पर खेलकर सत्ता को चुनौती देती लड़कियां

ईरान एक बदलाव के मोड पर खड़ा है. ऐसा ही विरोध ईरान ने साल 2022 में देखा था. महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत ने पूरे मुल्क में बगावत की एक लहर खड़ी कर दी थी. महसा अमीनी पर पर आरोप था कि उसने हिजाब के कानून को नहीं माना. इस ड्रेस कोड के उल्लंघन पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया और फिर पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई.

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अमीनी के अलावा भी कई नाम थे उन लड़कियों के जो मारी गई. इनमें निका शकरमी, हदीस नजफी, सरीना इस्माइलजदेह शामिल हैं. उसके बाद एक के बाद एक वो बहादुर लड़कियां अपनी जान पर खेलकर सत्ता को चुनौती देती रही हैं. कई नाम हैं जो विरोध और बहादुरी का प्रतीक बन गए हैं.

एक छात्रा अहू दरयाई ने नवंबर 2024 में तेहरान के एक विश्वविद्यालय में हिजाब विरोध में कपड़े उतारकर बैठने जैसे साहसी विरोध का प्रदर्शन किया. गिरफ्तारी और बाद की हिफ़ाज़त ने उन्हें प्रतिरोध का प्रतीक बना दिया।

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इसी में एक नाम है आर्मिता अब्बासी का. वो लड़की जो अक्टूबर 2022 में विरोध के दौरान गिरफ्तार हुई थी. गिरफ्तारी के बाद उनके साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी सामने आया .

मानवाधिकार कार्यकर्ता और लेखक गुलरुख इब्राहिमी को 2022 के आंदोलन के दौरान घर से गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि वे पहले भी महिलाओं के अधिकार और सख्त दंड नीतियों के खिलाफ आवाज उठाती रही थीं.

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इल्हाम मदरेस्सी, एक कलाकार और नारी अधिकार की समर्थक को जन, जिंदगी, आजादी, विरोध में भाग लेने के लिए गिरफ्तार किया गया.

इस्‍लामिक क्रांति के बाद महिलाओं पर पहरा

1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान में शाह के शासन के दौरान महिलाओं की हालत आज की तुलना में कहीं अधिक स्वतंत्र थी. हिजाब अनिवार्य नहीं था और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं शिक्षा, नौकरियों और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रूप से भाग लेती थीं. 1963 में उन्हें मतदान का अधिकार मिला और पारिवारिक कानूनों में सुधार के जरिए तलाक और बहुविवाह जैसे मामलों में कुछ सुरक्षा प्रदान की गई. हालांकि यह बदलाव मुख्यतः शहरों तक सीमित रहा. क्रांति के बाद धार्मिक कानूनों के तहत महिलाओं की स्वतंत्रताओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए, हिजाब और कई सख्‍त पाबंदियों की पृष्ठभूमि में आज की इस बगावत को बेहतर समझा जा सकता है.

ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे की पंक्ति में महिलाएं सिर्फ बराबरी की भागीदार ही नहीं बल्कि परिवर्तन की मुख्य शक्ति बनकर उभरी हैं. गिरफ्तारी, हिंसा और दमन के खतरे के बावजूद सड़कों पर उनकी मौजूदगी ने इस आंदोलन को सम्मान, स्वतंत्रता और चुनाव के अधिकार की व्यापक लड़ाई में बदल दिया है. दशकों से थोपे गए प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए ईरानी महिलाओं ने विरोध की हिम्मत की है, उनकी आवाजें आज ईरान की सीमाओं से परे गूंज रही हैं और यह याद दिला रही हैं कि समानता और आजादी की मांग एक बार उठ जाए तो उसे दबाना आसान नहीं होता है.

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