6,580 करोड़ कीमत, उड़ता रडार-कमांड सेंटर... ईरान ने अमेरिका की जिस 'तीसरी आंख' को फोड़ा, उसकी खासियत जानिए

ईरान का दावा है कि सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमले में अमेरिका का अवाक्स सिस्टम तबाह हो गया है. ईरान ने यहां पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है.

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नई दिल्ली:

ईरान लगातार खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. इस बीच ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिका के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर बड़ा हमला किया. दावा किया जा रहा है कि इस हमले में अमेरिका का अवाक्स सिस्टम तबाह हो गया है. इस खबर ने दुनिया को चौंका दिया है कि ईरान के जखीरे में अभी भी बहुत कुछ बचा है, जिससे उसने दुनिया के सबसे शक्तिशाली मुल्क की वायुसेना की 'तीसरी आंख' को तबाह कर दिया. इतना ही नहीं, ईरान ने ये भी दावा किया है कि उसने हमले में एयर टू एयर रिफ्यूलर को भी नुकसान पहुंचा है और दर्जन भर अमेरिकी सैनिक भी घायल हुए हैं. 

यह इसलिए हैरान करने वाली बात है कि क्योंकि इस एयरबेस की सुरक्षा अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम THAAD और पैट्रियट के हवाले है. यानी, ईरानी मिसाइल और ड्रोन ने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को उड़ाकर रख दिया. ईरान ने यह हमला तब किया, जब उसने आरोप लगाया कि अमेरिका ने इस बेस का इस्तेमाल उस पर हमले के लिए लॉन्चपैड के तौर पर किया था.

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ये अवाक्स होता क्या है?

अवाक्स यानी एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम. इसे 'आई इन द स्काई' यानी 'आसमानी आंख' भी कहा जाता है. यह एयरबोर्न कमांड सेंटर हवाई युद्धों को ट्रैक, लक्ष्य और नियंत्रण करता है. यह दुश्मन के खतरों की निगरानी और जवाब देने में अहम भूमिका निभाता है. यह एक तरह का एयरबोर्न चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली है. इसे अमेरिका की बोइंग कंपनी ने ई-3 सेंट्री को बनाया है. इसे बोइंग ने 707 प्लेटफॉर्म पर बनाया हैं. यह करीब 400 किलोमीटर के दायरे में हवाई क्षेत्र की निगरानी कर सकता है. यह एक साथ 600 से ज्यादा लक्ष्यों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में सक्षम है, जिसमें कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरे भी शामिल हैं. यह रियल टाइम में विमान, मिसाइलों और अन्य खतरों का पता लगा सकता है.

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उड़ता हुआ रडार और कमांड सेंटर

ई-3 अवाक्स को एक तरह से उड़ता हुआ रडार और कमांड सेंटर माना जाता है. जरूरत के मुताबिक यह फाइटर जेट्स को निर्देश भी देता है. एयरोस्पेस को कंट्रोल करता है. यह सैन्य हमलों को समन्वय भी करता है. बड़े सैन्य अभियानों के दौरान यह अर्ली वॉर्निंग और बैटल मैनेजमेंट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभाता है. इस विमान के नुकसान का असर खाड़ी में ऑपरेशनल क्षमता पर भी पड़ता है. यह हर दिशा पर नजर रखता है. हवा और समुद्र दोनों में गतिविधियों पर नजर रखता है. यह विमान, मिसाइल और ड्रोन को एक साथ ट्रैक कर सकता है.

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अवाक्स पर हमला कितनी बड़ी चोट?

रक्षा जानकार बताते है कि ई-3 का नष्ट होना बेहद चिंताजनक है, क्योंकि ये बैटल मैनेजर हवाई क्षेत्र में टकराव को रोकने, विमानों के बीच टकराव को रोकने, लक्ष्यीकरण करने और युद्धक्षेत्र में पूरी सेना को आवश्यक अन्य घातक प्रभाव प्रदान करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इससे अमेरिकी वायु सेना को नुकसान पहुंच सकता है. इतना ही नहीं ईरानी सेना को निशाना बनाने के अवसरों से चूक हो सकती है. 

साथ में वह यह भी कहते है कि शार्ट टर्म में यह युद्ध के लिये बड़ा नुकसान है. इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. कवरेज एरिया में कमी आएगी. खासकर फाइटर पायलट दुश्मन के इलाके में ऑपरेशन के लिए इस पर ही निर्भर करते हैं. आसान शब्दों में समझें तो अवाक्स शतरंज का उस्ताद है ओर लड़ाकू विमान के पायलट एक मोहरे भर हैं, क्योंकि वह पूरे एरिया को देख पाता है.

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अमेरिका के पास ऐसे कितने सिस्टम?

एक अवाक्स की कीमत करीब 6,580 करोड़ से ज्यादा पड़ती है. अमेरिका के पास ऐसे 15 से 16 सिस्टम ही बचे है. ऐसे में एक भी अवाक्स सिस्टम का नुकसान होना बहुत मायने रखता है. खासकर उस हालात में जब अमेरिका को सुपरपावर माना जाता है . उसके हथियार अव्वल माने जाते हैं. ईरान का उस बेहतरीन हथियार का तबाह कर देना उसकी साख पर सवाल उठाता है.

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