उधर होर्मुज खुला, इधर एक महीने और बढ़ गई रूसी तेल खरीदने की छूट, भारत को किस तरह होगा फायदा?

नई दिल्ली में रूस के भारत में राजदूत डेनिस अलीपोव ने भरोसा दिलाया है कि रूस भारत को कच्चा तेल (क्रूड), एलपीजी और एलएनजी समेत ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति और बढ़ाएगा. भारत इधर होर्मुज से अपने टैंकर आासनी से पार करा पाएगा तो उधर रूस से भी तेल खरीद बढ़ा देगा.

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  • अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने की छूट अवधि 16 मई तक बढ़ा दी है, जो पहले 11 अप्रैल को खत्म हो चुकी थी
  • यह फैसला वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने और युद्ध के प्रभाव को कम करने के लिए लिया गया है
  • रूस ने भारत को कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी समेत ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है
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नई दिल्ली:

सीजफायर के बीच होर्मुज स्ट्रेट खोलने के ईरान के फैसले के बीच अमेरिका ने भी रूसी तेल खरीदने की छूट अवधि बढ़ा दी है. ट्रंप प्रशासन ने ये फैसला 11 अप्रैल को खत्म हो चुकी डेडलाइन के बाद दिया है. इसके बाद भारत के लिए भी रूस से तेल खरीदना आसान हो जाएगा. यह फैसला ऐसे समय लिया गया, जब प्रशासन ने दो दिन पहले कहा था कि वह इस छूट को आगे बढ़ाने की योजना नहीं बना रहा है. बता दें कि ट्रंप सरकार के इस फैसले के बाद देश समुद्र के रास्ते प्रतिबंधित रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीद सकते हैं.

अब 16 मई तक बढ़ी छूट की तारीख 

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार देर रात अपनी वेबसाइट पर यह लाइसेंस जारी किया. इसके तहत देशों को शुक्रवार से 16 मई तक जहाजों पर लदे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी गई है. यह लाइसेंस उस 30‑दिवसीय छूट की जगह लाया गया है, जिसकी अवधि 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी.यह कदम अमेरिका‑इजरायल और ईरान युद्ध के दौरान बढ़ी वैश्विक ऊर्जा कीमतों को काबू में रखने के प्रशासन के प्रयासों का हिस्सा है.हालांकि, इस लाइसेंस में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े किसी भी तरह के लेन‑देन को शामिल नहीं किया गया है.

भारत के लिए भी फायदा

इस बीच नई दिल्ली में रूस के भारत में राजदूत डेनिस अलीपोव ने भरोसा दिलाया है कि रूस भारत को कच्चा तेल (क्रूड), एलपीजी और एलएनजी समेत ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति और बढ़ाएगा. अलीपोव के अनुसार, रूस ने पहले ही भारत को तेल की आपूर्ति में काफी बढ़ोतरी की है और भारत को जितनी जरूरत होगी, उतनी मात्रा में ऊर्जा संसाधन देने के लिए वह तैयार है. उन्होंने कहा कि भारत एक भरोसेमंद साझेदार रहा है और उसका रुख हमेशा स्थिर और लगातार रहा है, जो पश्चिमी देशों से अलग है

एक यूरोपीय थिंक टैंक के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा है. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने मंगलवार को बताया कि मार्च में भारत ने रूस से 5.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जबकि फरवरी में यह आंकड़ा 1.54 अरब डॉलर था यानी एक ही महीने में यह आयात तीन गुना से ज्यादा हो गया. रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में भारत ने रूस से 371 मिलियन डॉलर का कोयला और 196 मिलियन डॉलर के तेल उत्पाद भी आयात किए. मार्च 2022 के बाद से नई दिल्ली रूसी तेल के लिए एक बड़ा बाज़ार बनकर उभरा है। 2024 में भारत ने रूस से रोजाना करीब 20 लाख बैरल तेल खरीदा, जबकि पिछले साल भारत ने मॉस्को से करीब 44 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया था.

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अमेरिकी सांसदों ने जताई कड़ी नाराजगी

बुधवार को अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि अमेरिका रूसी तेल के लिए दी गई छूट को नवीनीकृत(रिन्यू) नहीं करेगा और न ही ईरानी तेल से जुड़ी छूट को आगे बढ़ाएगा, जिसकी अवधि रविवार को खत्म हो रही है. बेसेंट ने पिछले महीने बताया था कि 20 मार्च को जारी की गई ईरानी छूट के तहत करीब 14 करोड़ बैरल तेल वैश्विक बाजार तक पहुंच पाया था. इससे युद्ध के दौरान ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा दबाव कुछ हद तक कम हुआ था. हालांकि, अमेरिका के दोनों राजनीतिक दलों के सांसदों ने प्रशासन के इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी. सांसदों का कहना था कि इस तरह की प्रतिबंधों में दी गई छूट से ऐसे समय में ईरान की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंच सकता है और रूस को भी लाभ मिल सकता है, जो यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है.

रूस के राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रिएव ने कहा था कि पहली छूट से 10 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल बाजार में आ सकेगा, जो लगभग दुनिया की एक दिन की कुल तेल खपत के बराबर है. हालांकि प्रतिबंधों में दी गई राहत से कुछ समय के लिए वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ सकती है, लेकिन इससे तेल की कीमतों में तेज उछाल नहीं रुका है.इसकी बड़ी वजह ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से बंद करना है, जहां से युद्ध से पहले दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता था.

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