ईरान के लिए जंग में सुप्रीम लीडर की मौत से भी बड़ा झटका है सिक्योरिटी चीफ का मरना! समझिए ऐसा क्यों?

US Iran War: अबतक की 18 दिनों की जंग में ईरान को संभवतः सबसे बड़ा झटका लगा है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इजरायली हमलों में सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी की मौत की पुष्टि कर दी है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
US Israel War Against Iran: ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी की मौत
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • इजरायल के हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी की मौत हो गई, इसकी पुष्टि हो चुकी है.
  • अली लारिजानी ने ईरान के परमाणु वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और खामेनेई के निकट सलाहकार थे
  • लारिजानी की मौत को ईरानी नेतृत्व के लिए खामेनेई की मौत से भी बड़ा नुकसान माना जा रहा है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

मिडिल ईस्ट में जारी जंग में ईरान को अबतक का सबसे बड़ा झटका लगा है, कम से कम रणनीतिक लिहाज से. इजरालय के हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी की मौत हो गई है. इस बात की पुष्टि खुद ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कर दी है. काउंसिल  ने कहा कि मंगलवार तड़के हुए हमले में अली लारिजानी के साथ-साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारिजानी, काउंसिल के सचिवालय में सुरक्षा मामलों के डिप्टी अलीरेज़ा बयात और कई अन्य लोगों की भी मौत हुई है. ईरान के लिए उसके सिक्योरिटी चीफ लारिजानी की मौत को सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत से भी बड़ा झटका माना जा रहा है. सवाल है कि क्यों?

आखिर ईरान के लिए इतने अहम क्यों थे अली लारिजानी?

अली लारिजानी पहले 10 सालों तक ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर के प्रमुख थे और सबकुछ उनके कंट्रोल में था. फिर 2004 में देश के सुप्रीम लीडर खामेनेई के सुरक्षा सलाहकार बनने के लिए उन्होंने वह पद छोड़ दिया. 2005 में, लारिजानी को ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव नियुक्त किया गया.

2005 में उन्हें ईरान की ओर से शीर्ष परमाणु वार्ताकार नियुक्त किया गया और इसके बाद उन्होंने परमाणु फाइल पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने अपने परमाणु फ्यूल को छोड़ने के बदले में उस समय यूरोपीय संघ द्वारा दिए जा रहे छूट को स्वीकार करता है, तो यह एक मोती देकर टॉफी लेने के बराबर होगा.  लारिजानी ने अक्टूबर 2007 में ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार का पद छोड़ दिया.

लारिजानी ने ईरान के 2021 और 2024 के राष्ट्रपति चुनावों में भाग लेने की कोशिश की थी लेकिन ईरान के कट्टरपंथी चुनाव निगरानी निकाय ने उनकी कोशिश को खारिज कर दिया. 2020 में, खामेनेई ने लारिजानी को अपने राजनीतिक सलाहकार और एक्सपेडिएंसी काउंसिल के सदस्य के रूप में नियुक्त किया.

अली लारिजानी की मौत खामेनेई की मौत से बड़ा झटका क्यों?

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की अली लारिजानी की मौत ईरान के लिए एक विनाशकारी झटका है और संभवतः युद्ध की शुरुआत में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत से भी बड़ा उलटफेर है. ईरानी नेतृत्व को कमजोर करने के किसी भी प्रयास में, लारिजानी हमेशा मुख्य टारगेट माने जा रहे थे- मुख्य रूप से ईरानी राजनीति के कई स्तरों पर फैलने की उनकी क्षमता और न केवल ईरान में बल्कि चीन और रूस सहित दूसरे देशों में उनके विशाल व्यक्तिगत प्रभाव के कारण. रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2020 में बगदाद में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नेता कासिम सुलेमानी की अमेरिका द्वारा हत्या के बाद से ईरानी शासन के लिए शायद इससे बड़ा कोई नुकसान नहीं हुआ है.

Advertisement

यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स में ईरान विशेषज्ञ ऐली गेरानमायेह ने कहा कि इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अब ईरान के साथ सीजफायर करने की कोशिश में लगे ट्रंप के रास्ते को रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. सीजफायर के बाद ईरान और अमेरिका के बाद जो भी बातचीत होती, लारिजानी उस काम को पूरा करने वाले व्यक्ति होते. इसलिए इजरायल ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया है.

यह भी पढ़ें: ईरान ने सिक्योरिटी चीफ की मौत की बात कबूली, होर्मुज के पास मिसाइल ठिकानों पर अमेरिका का हमला- TOP 10 अपडेट

Advertisement
Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti | Kabul में अस्पताल पर Pakistani हमले में कई लोगों की मौत, भारत ने जारी किया बयान
Topics mentioned in this article