वेनेजुएला पर आज UNSC की आपात बैठक, अमेरिकी कार्रवाई पर दो खेमों में बंटी दुनिया; रूस-चीन सहित कौन साथ कौन खिलाफ?

मादुरो सरकार का पतन और अमेरिका द्वारा उनकी गिरफ्तारी किया जाना बीजिंग के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि मादुरो के पूर्ववर्ती ह्यूगो शावेज के समय से ही वेनेजुएला के साथ चीन के घनिष्ठ रणनीतिक संबंध रहे हैं.

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  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वेनेजुएला पर अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य ऑपरेशन को लेकर आपात बैठक बुलाई है
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने अमेरिका की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है
  • अमेरिका की कार्रवाई पर चीन, रूस सहित कई देशों ने निंदा की और वेनेजुएला की संप्रभुता का सम्मान करने की मांग की
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नई दिल्ली:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सोमवार को वेनेजुएला के मुद्दे पर एक आपातकालीन बैठक आयोजित करने जा रही है. इसका मुख्य एजेंडा अमेरिका द्वारा किए गए हालिया सैन्य ऑपरेशन और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी है. अमेरिकी सेना निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अपने देश ले गई है. इस बड़े वैश्विक घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है.

सुरक्षा परिषद की प्रेसिडेंसी की ओर से जानकारी दी गई है कि यह आपात बैठक सोमवार सुबह 10 बजे होगी. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, सोमालिया जनवरी महीने के लिए सुरक्षा परिषद की रोटेटिंग प्रेसीडेंसी संभाल रहा है. अमेरिका की इस कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई बेहद खतरनाक उदाहरण बन सकती है.

महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि गुटेरेस को आशंका है कि इस सैन्य कदम के पूरे क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है. उनका कहना है कि वेनेजुएला की स्थिति चाहे जैसी भी हो, ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए खतरनाक मिसाल हैं. उन्होंने कहा, "महासचिव सभी के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से सम्मान करने के महत्व पर जोर देते रहते हैं. इसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी शामिल है. वह इस बात से बहुत चिंतित हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का सम्मान नहीं किया गया है." गुटेरेस ने वेनेजुएला में मानवाधिकारों और कानून के शासन का सम्मान करते हुए सभी पक्षों के बीच संवाद की जरूरत पर जोर दिया है.

वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई को लेकर दो खेमों में बंटी दुनिया

इधर वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को लेकर दुनिया दो खेमे में बंटी हुई नजर आ रही है. एक तरफ कई देश ऐसे हैं, जो अमेरिका की ओर से की गई कार्रवाई की घोर आलोचना कर रहे हैं, तो वहीं एक पक्ष ऐसा है, जो इसका समर्थन कर रहा है.

आइए जानते हैं कि दुनिया के कौन-कौन से देश अमेरिका के साथ खड़े हैं और कौन से देश उसके खिलाफ-

  1. रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया, चिली, बेलारूस, उरुग्वे, स्लोवाकिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, श्रीलंका, उत्तर कोरिया, घाना और सिंगापुर जैसे देशों ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की है.
  2. इन देशों ने अमेरिका की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है. दूसरे देशों के अलावा अमेरिका में भी ट्रंप सरकार की इस कार्रवाई की आलोचना हो रही है.
  3. इसके अलावा अर्जेंटीना, इजरायल, पेरू, अल साल्वाडोर, इक्वाडोर, अल्बानिया, फ्रांस और ब्रिटेन ने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया है.
  4. अगर भारत की बात करें तो विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में एक बयान जारी कर दोनों देशों से इस मामले को शांति से हल करने की अपील की है.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, "वेनेजुएला में हाल की घटनाएं गहरी चिंता का विषय हैं. हम बदलते हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं. भारत वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. हम सभी संबंधित लोगों से अपील करते हैं कि वे बातचीत के जरिए शांति से मुद्दों को सुलझाएं, ताकि इलाके में शांति और स्थिरता बनी रहे. काराकास में भारतीय दूतावास भारतीय समुदाय के लोगों के संपर्क में है और हर मुमकिन मदद देता रहेगा."

मादुरो सरकार का पतन बीजिंग के लिए एक बड़ा झटका

चीन ने अमेरिका के वेनेजुएला में की गई कार्रवाई की खुलकर विरोध किया है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने की मांग की है. चीन ने कहा कि ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों तथा सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है. बयान में कहा गया, “चीन अमेरिका से अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें तुरंत रिहा करने, वेनेजुएला सरकार को गिराने का प्रयास रोकने तथा संवाद एवं बातचीत के माध्यम से मुद्दों को हल करने का आह्वान करता है.”

चीन ने कहा कि ये अमेरिका का वर्चस्ववादी कृत्य है. वह एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ अमेरिका द्वारा बल का खुलेआम इस्तेमाल किए जाने और उसके राष्ट्रपति के खिलाफ कार्रवाई से बेहद स्तब्ध है तथा इसकी कड़ी निंदा करता है. चीन इसका कड़ा विरोध करता है. हम अमेरिका से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों तथा सिद्धांतों का पालन करने और अन्य देशों की संप्रभुता व सुरक्षा का उल्लंघन बंद करने का आह्वान करते हैं.

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मादुरो सरकार का पतन और अमेरिका द्वारा उनकी गिरफ्तारी किया जाना बीजिंग के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि मादुरो के पूर्ववर्ती ह्यूगो शावेज के समय से ही वेनेजुएला के साथ चीन के घनिष्ठ रणनीतिक संबंध रहे हैं.

अमेरिका की कार्रवाई बहुत चिंताजनक और निंदनीय- रूस

रूस ने भी अमेरिका के इस हरकत पर अपना गुस्सा जाहिर किया है. रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की कार्रवाई को "बहुत चिंताजनक" और निंदनीय बताया और कहा, "ऐसी कार्रवाइयों को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बहाने बेकार हैं. विचारधारा की दुश्मनी ने बिजनेस जैसी प्रैक्टिकल सोच और भरोसे और पहले से तय रिश्ते बनाने की इच्छा पर जीत हासिल कर ली है."

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रूस ने जोर देकर कहा कि जिन सभी साझेदारों को एक-दूसरे से शिकायतें हैं, उन्हें बातचीत से हल निकालना चाहिए और आगे बढ़ने से रोकना चाहिए. बयान में आगे कहा गया, "लैटिन अमेरिका को वही शांति वाला इलाका बना रहना चाहिए, जैसा उसने 2014 में खुद को बताया था, और वेनेजुएला को बिना किसी नुकसान पहुंचाने वाले, मिलिट्री तो छोड़ ही दें, बाहरी दखल के अपनी किस्मत खुद तय करने का हक मिलना चाहिए."

रूस ने आगे कहा कि हम वेनेजुएला के लोगों के साथ अपनी एकजुटता और उनके बोलिवेरियन लीडरशिप के रास्ते के लिए अपने समर्थन को फिर से पक्का करते हैं, जिसका मकसद देश के राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा करना है।

तानाशाही शासन को खत्म करने के लिए बाहरी सैन्य कार्रवाई सही रास्ता नहीं- इटली

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा, "मैंने वेनेजुएला में हो रहे डेवलपमेंट पर शुरुआती बदलावों से ही नजर रखी है. इटली ने अपने मुख्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर मादुरो की खुद से कही गई चुनावी जीत को कभी मान्यता नहीं दी, सरकार के दमनकारी कार्यों की निंदा की और हमेशा वेनेजुएला के लोगों की लोकतांत्रिक बदलाव की उम्मीद का समर्थन किया है."

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जॉर्जिया मेलोनी ने कहा, "इटली की पुरानी स्थिति के हिसाब से सरकार का मानना ​​है कि तानाशाही शासन को खत्म करने के लिए बाहरी सैन्य कार्रवाई सही रास्ता नहीं है, लेकिन सरकार अपनी सुरक्षा पर हाइब्रिड हमलों के खिलाफ बचाव के तौर पर दखल को सही मानती है, जैसा कि उन सरकारी संस्थाओं के मामले में होता है जो नशीली दवाओं की तस्करी को बढ़ावा देती हैं और उसका समर्थन करती हैं. हम वेनेजुएला में इटालियन समुदाय की स्थिति पर खास ध्यान दे रहे हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है."

ऑस्ट्रेलिया को लंबे समय से वेनेजुएला के हालात को लेकर चिंता

ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज ने दोनों पक्षों से बातचीत कर समस्या हल करने की अपील करते हुए कहा, "ऑस्ट्रेलियाई सरकार वेनेजुएला में हो रहे डेवलपमेंट पर नजर रख रही है. हम सभी पार्टियों से अपील करते हैं कि वे इलाके में स्थिरता बनाए रखने और तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी का साथ दें. ऑस्ट्रेलिया को लंबे समय से वेनेजुएला के हालात को लेकर चिंता है, जिसमें लोकतांत्रिक सिद्धांतों, मानवाधिकारों और बुनियादी आजादी का सम्मान करने की जरूरत भी शामिल है."

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