गाजा नहीं, दुनिया के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा सूडान, 2 साल के गृहयुद्ध में UAE का हाथ? 

सूडान में 15 अप्रैल, 2023 को आर्मी और अर्धसैनिक बलों के बीच सत्ता के लिए युद्ध शुरू हुआ और इसमें हजारों लोग मारे गए हैं. युद्ध ने सूडान के कुछ हिस्सों को अकाल की स्थिति में धकेल दिया और देश को ऐसे क्षेत्रों में बांट दिया है जिसपर अलग-अलग वॉरलॉर्ड का कब्जा है.

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सूडान में 15 अप्रैल, 2023 को आर्मी और अर्धसैनिक बलों के बीच सत्ता के लिए युद्ध शुरू हुआ था
एएफपी

सूडान अभी विश्व स्तर पर सबसे बड़े मानवीय संकट से गुजर रहा है. यहां की आर्मी और पैरामिलिट्री के बीच गृहयुद्ध को शुरू हुए ठीक दो साल गुजर गए हैं और हिंसा रुकने की जगह और तेज हो गई है. गैर सरकारी संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस अफ्रीकी देश के नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी की कीमत चुकानी पड़ रही है.

सूडान की रुकी हुई शांति वार्ता को फिर से शुरू करने के प्रयास में ब्रिटेन मंगलवार को लंदन में 20 देशों के मंत्रियों की मेजबानी कर रहा है. हालांकि पिछले दो सालों में सूडान की शांति के लिए राजनयिक प्रयासों को उतनी तरजीह नहीं मिली, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर यूक्रेन और गाजा में युद्ध सहित अन्य कई संकटों पर टिकी रही.

1.3 करोड़ लोगों को घर छोड़ना पड़ा

संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को कहा कि सूडान में दो साल के गृह युद्ध में 13 मिलियन लोग विस्थापित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अब्दौराहौफ ग्नोन-कोंडे ने न्यूज एजेंसी एएफपी के साथ एक इंटरव्यू में कहा, "संघर्ष ने 13 मिलियन लोगों को विस्थापन को मजबूर किया है, जिसमें 8.6 आंतरिक रूप से विस्थापित लोग और 3.8 मिलियन शरणार्थी शामिल हैं."

15 अप्रैल, 2023 को यहां की आर्मी और अर्धसैनिक बलों के बीच सत्ता के लिए युद्ध शुरू हुआ और इसमें हजारों लोग मारे गए हैं. युद्ध ने सूडान के कुछ हिस्सों को अकाल की स्थिति में धकेल दिया और देश को ऐसे क्षेत्रों में बांट दिया है जिसपर अलग-अलग वॉरलॉर्ड का कब्जा है.

ठीक जब यह गृहयुद्ध अपने तीसरे साल में प्रवेश कर रहा है, उस समय भी हिंसा चरम पर है. पैरामिलिट्री फोर्स का हमला गुरुवार को शुरू हुआ और रविवार की सुबह तक जारी रहा, जिसमें अल-फशर और जमजम और अबू शौक सहित आसपास के विस्थापन शिविरों को निशाना बनाया गया. दोनों अकाल से प्रभावित इलाके हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने "विश्वसनीय स्रोतों" का हवाला देते हुए कहा कि इस बार की हिंसा में 400 से अधिक लोग मारे गए हैं. रविवार तक, पैरामिलिट्री फोर्स ने जमजम पर नियंत्रण का दावा किया. संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने कहा कि तब से, लगभग 400,000 लोग शिविर से विस्थापित हो चुके हैं.

डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने कहा कि गोलाबारी से बचने के लिए 48 घंटों के भीतर लगभग 10,000 लोग अल-फशर से लगभग 70 किलोमीटर पश्चिम में तवीला की ओर भाग गए. इंटरनेशनल मेडिकल चैरिटी ने कहा, नागरिक, ज्यादातर महिलाएं और बच्चे, "डिहाइड्रेशन और थकावट की चरम स्थिति में पहुंचे और भयानक हिंसा की खबर दे रहे थे".

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क्या सूडान में हथियार भेज रहा UAE?

संयुक्त अरब अमीरात पर पड़ोसी देश चाड के रास्ते से सूडान की पैरामिलिट्री को गुप्त रूप से हथियारों की सप्लाई करने का आरोप लगता रहा है. इस आरोप का उसने लगातार खंडन किया है. लेकिन द गार्डियन के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की लीक हुई खुफिया रिपोर्ट ने सूडान के गृहयुद्ध में यूएई की भूमिका पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार UAE से कई ऐसी फ्लाइट का पता चला है जिन्होंने स्पष्ट रूप से पहचाने जाने से खुद को बचने के लिए जानबूझकर प्रयास किए थे. 

यह रिपोर्ट 14 पन्नों की है और पिछले नवंबर में पूरी हुई. इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सूडान प्रतिबंध समिति को भेजा गया था. इसे संयुक्त राष्ट्र के पांच विशेषज्ञों के एक पैनल ने लिखी है. उन्होंने चाड में "UAE से आने वाली इल्यूशिन आईएल-76टीडी कार्गो उड़ानों के एक लगातार पैटर्न का दस्तावेजीकरण किया", जहां से उन्होंने पड़ोसी सूडान में हथियार ले जाने के लिए संभावित रूप से उपयोग किए जाने वाले कम से कम तीन भूमिगत मार्गों की पहचान की.

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सूडान की सरकार अभी वहां की आर्मी के हाथ में है और उसने UAE पर वर्तमान गृहयुद्ध के दौरान "नरसंहार में शामिल" होने का आरोप लगाया है और इसको लेकर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में एक केस दायर किया है.. सूडान सरकार (आर्मी) का आरोप है कि UAE पश्चिम दारफुर की गैर-अरब मासालिट आबादी को खत्म करने के उद्देश्य से पैरामिलिट्री (RSF) को हथियार दे रहा है. इस आरोप पर UAE ने कहा है कि यह केस केवल एक सनकी प्रचार स्टंट है और इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए.
 

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