सोवियत संघ के 'जेम्स बॉन्ड' और पुतिन के जिगरी दोस्त की मौत, रूसी राष्ट्रपति ने की लुकाशेंको से बात

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का मानना ​​है कि पुतिन, लुकाशेंको को इस संघर्ष में रूस के लिए अपना समर्थन बढ़ाने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं.मॉस्को और मिन्स्क इस बात से इनकार करते हैं.

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इवानोव को पुतिन बहुत पसंद करते थे, मगर उनसे सतर्क भी रहते थे. (फोटो-AFP)
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  • रूस के पूर्व रक्षा मंत्री सर्गेई इवानोव का 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया, कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है.
  • सर्गेई इवानोव और पुतिन की दोस्ती 1970 के दशक में लेनिनग्राद में KGB अधिकारियों के रूप में शुरू हुई थी.
  • इवानोव ने 2001 से 2007 तक रक्षा मंत्री के रूप में चेचन्या युद्ध की देखरेख की और अलगाववादी प्रयासों को रोका.

रूस के पूर्व रक्षा मंत्री और सोवियत संघ के जासूस सर्गेई इवानोव का निधन हो गया है. सर्गेई इवानोव को सोवियत संघ काल में 'जेम्स बॉन्ड' की तरह माना जाता था. मतलब मिशन दिया तो उसका पूरा होना पक्का है. सर्गेई अभी 73 वर्ष के थे. उन्हें कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता था. क्रेमलिन ने बताया कि इवानोव का निधन शुक्रवार को हुआ, लेकिन मौत का कारण या अन्य विवरण नहीं दिए. 

पुतिन से कैसे हुई दोस्ती 

पुतिन ने इवानोव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की. पुतिन और इवानोव 1970 के दशक से एक-दूसरे को जानते थे, जब वे दोनों अपने गृहनगर लेनिनग्राद (सोवियत काल में सेंट पीटर्सबर्ग को इसी नाम से जाना जाता था) में युवा KGB अधिकारियों के रूप में काम करते थे. दोनों ने कई मिशन एक साथ पूरे किए. यहीं दोनों के बीच दोस्ती और गाढ़ी हुई. फिर जब पुतिन पहली बार 2000 में राष्ट्रपति चुने गए, तो इवानोव को रूस की सुरक्षा परिषद का सचिव बनाया. फिर 2001 में, पुतिन ने इवानोव को अपना रक्षा मंत्री बनाया. उन्होंने 2007 तक यह पद संभाला और चेचन्या में दूसरे युद्ध की देखरेख की, जिसने उस क्षेत्र की अलगाववादी कोशिशों को कुचल दिया.

फिर सर्गेई से डरे पुतिन

जब पुतिन ने कार्यकाल की सीमा के कारण पद छोड़ने और 2008 में प्रधानमंत्री का पद संभालने का फैसला किया, तो इवानोव को उनका सबसे संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था. हालांकि, पुतिन ने 2012 में राष्ट्रपति पद वापस संभालने तक अपनी जगह काम करने के लिए एक अन्य पुराने सहयोगी, दिमित्री मेदवेदेव को चुना. कुछ जानकारों का मानना ​​था कि पुतिन ने इवानोव की उम्मीदवारी को इसलिए खारिज कर दिया, क्योंकि वे उन्हें बहुत अधिक महत्वाकांक्षी मानते थे और उन्हें डर था कि वे राष्ट्रपति पद पर बने रहने की कोशिश कर सकते हैं.

यूक्रेन युद्ध में लगा बैन

इवानोव 2007-2011 तक उप प्रधानमंत्री के रूप में पुतिन के साथ रहे और फिर 2011-2016 तक क्रेमलिन के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य किया. 2016 में, इवानोव को पर्यावरण संरक्षण और परिवहन के लिए राष्ट्रपति का विशेष दूत नियुक्त किया गया. इस पद का कोई राजनीतिक महत्व नहीं था और इसे व्यापक रूप से एक सम्मानजनक रिटायरमेंट के रूप में देखा गया. उन्होंने इस साल की शुरुआत में पद छोड़ दिया. यूक्रेन में मॉस्को की सैन्य कार्रवाई के जवाब में, अन्य शीर्ष रूसी अधिकारियों के साथ-साथ इवानोव को भी अमेरिका और यूरोपीय संघ के बैन का सामना करना पड़ा था. 

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लुकाशेंको और पुतिन ने की बात

क्रेमलिन ने बताया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने शुक्रवार को बातचीत की. उम्मीद है कि यह बातचीत यूक्रेन युद्ध पर केंद्रित होगी. उत्तर-पश्चिमी रूस में पुतिन के वल्दाई आवास पर हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार और आर्थिक सहयोग, संयुक्त परियोजनाओं को लागू करने और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा की. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इससे पहले सरकारी समाचार एजेंसी TASS को बताया था कि बैठक के बाद कोई प्रेस बयान या दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की योजना नहीं थी. यह बैठक बेलारूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुई है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का मानना ​​है कि पुतिन, लुकाशेंको को इस संघर्ष में रूस के लिए अपना समर्थन बढ़ाने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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बेलारूस ने दी है यूक्रेन को धमकी

मॉस्को और मिन्स्क इस बात से इनकार करते हैं. बेलारूस का कहना है कि यूक्रेन और पश्चिमी देश ही तनाव बढ़ा रहे हैं. लुकाशेंको ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने जेलेंस्की के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी और उन्हें चेतावनी दी थी कि वे उनके देश को युद्ध में घसीटने की कोशिश न करें. पुतिन और लुकाशेंको करीबी सहयोगी हैं और अक्सर मिलते रहते हैं. क्रेमलिन ने यूक्रेन पर बेलारूस की संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया है. जेलेंस्की ने पिछले शुक्रवार को मिन्स्क को सिग्नल रिले स्टेशन हटाने के लिए एक हफ्ते का समय दिया था; उनका कहना था कि इन स्टेशनों का इस्तेमाल रूसी हमलों को निर्देशित करने में किया जा रहा था. 

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