मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक रणनीति का केंद्र बन गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका हजारों जमीनी सैनिक इस क्षेत्र की ओर भेज रहा है और अटकलें हैं कि उसका अगला निशाना ईरान का खार्ग द्वीप हो सकता है, जहां से तेहरान अपने करीब 90 फीसदी तेल निर्यात को संभालता है.
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि खार्ग से भी ज्यादा अहम वे सात ईरानी द्वीप हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य की निगरानी और नियंत्रण की रणनीतिक चेन बनाते हैं. इनमें अबू मूसा, ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब, हेंगाम, क़ेश्म, लारक और हॉर्मुज़ शामिल हैं. चीनी और ईरानी शोधकर्ताओं ने इन्हें ईरान की 'आर्क डिफेंस' व्यवस्था का आधार बताया है.
इन आइलैंड की भौगोलिक स्थिति से ईरान को बढ़त
विशेषज्ञों के मुताबिक, इन द्वीपों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि फारस की खाड़ी से गुजरने वाले बड़े युद्धपोतों और तेल टैंकरों को इन्हीं के करीब से गुजरना पड़ता है. इससे ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स को फास्ट अटैक बोट, बारूदी सुरंगों और ड्रोन के जरिए जहाजों को निशाना बनाने की रणनीतिक बढ़त मिलती है. ईरानी अधिकारी इन द्वीपों को पहले ही 'डूब न सकने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर' बता चुके हैं.
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खास तौर पर अबू मूसा, ग्रेटर टुनब और लेसर टुनब को जलडमरूमध्य के पश्चिमी सिरे पर सबसे अहम माना जाता है. हाल के महीनों में ईरान ने यहां अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई थी. अब अमेरिकी और इजरायली हमलों में इन द्वीपों पर मौजूद सैन्य ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं.
अमेरिका के सामने क्या चुनौती
अमेरिकी सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यदि अमेरिका खार्ग द्वीप पर उतरने की कोशिश करता है, तो पहले इन रणनीतिक द्वीपों को निष्क्रिय करना जरूरी होगा. इसके लिए मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट्स (MEUs), हेलीकॉप्टर, ओस्प्रे विमान और पैराट्रूपर्स के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है. मगर द्वीपों पर कब्ज़ा आसान नहीं होगा और इसके लिए भारी सैन्य बल तथा लंबी कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है.
जंग जारी रहेगी या होगा सीजफायर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर सीधे हमले की समयसीमा 6 अप्रैल तक बढ़ाते हुए बातचीत का रास्ता खुला रखने के संकेत दिए हैं. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी वार्ता में प्रगति की बात कही है, लेकिन रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने साफ किया कि सैन्य अभियान जारी रहेगा.
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अगर US ने ये द्वीप जीत लिए तो होर्मुज से नियंत्रण खो देगा ईरान
विश्लेषकों का मानना है कि इन द्वीपों पर नियंत्रण से होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही सुरक्षित की जा सकती है, लेकिन इससे अमेरिका के लिए एक नया दीर्घकालिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील संघर्ष खड़ा हो सकता है. खासकर इसलिए क्योंकि इन द्वीपों पर यूएई और ईरान के बीच पुराना क्षेत्रीय विवाद भी जुड़ा है. कुल मिलाकर, होर्मुज़ के ये सात द्वीप सिर्फ भूगोल नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में मध्य‑पूर्व की जंग और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा तय करने वाले अहम मोहरे बनते जा रहे हैं.














