आशा भोसले के निधन की कवरेज करने वाले जियो टीवी को पाकिस्तान सरकार ने थमाया नोटिस, जानिए क्यों

आशा भोसले का इस दुनिया से चले जाना हर संगीत प्रेमी के लिए एक निजी नुकसान है. संगीत भाषा, क्षेत्र, धर्म, देशों की सीमा से परे सभी को एक सूत्र में बांधता है. मगर पाकिस्तान के हुक्मरान यहां भी अपनी नफरत लेकर आ गए.

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आशा भोसले ने अपने गीतों के जरिए करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया और करती रहेंगी.
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  • आशा भोसले का निधन 92 वर्ष की आयु में हुआ, उनकी आवाज आज भी विश्वभर में लोकप्रिय बनी हुई है
  • पाकिस्तान में आशा भोसले के निधन पर दुख जताया गया, लेकिन भारत विरोधी हुकूमत ने जियो न्यूज को नोटिस भेजा
  • पेमरा ने जियो न्यूज को आशा भोसले की मौत की खबर दिखाने और भारतीय गाने प्रसारित करने पर नोटिस जारी किया है
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आशा भोसले नहीं रहीं. उनके गीत दुनिया भर में अब भी सुने जा रहे हैं. संडे को 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. बुजुर्गों से लेकर आज की जेनरेशन तक के दिलों में अपनी आवाज से खास जगह बना चुकी आशा भोसले के निधन को हर किसी ने अपनी क्षति माना. हर कोई सालों से इस आवाज को सुनने का आदि हो चला था. शायद ही कोई ऐसा हो जिसने आशा भोसले के गीत ना सुने हो. ये देशों की सीमाओं से कब पार करते हुए लोगों के दिलों में समा गया, कहा नहीं जा सकता.

इतनी नफरत क्यों

आशा भोसले के निधन पर पाकिस्तान के लोग भी बहुत दुखी हुए. हर किसी को ये गम था कि अब वो खनकती आवाज कभी सुनाई नहीं देगी. कई पाकिस्तानी हस्तियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है. मगर पाकिस्तान के हुक्मरानों की भारत से नफरत यहां भी आड़े आ गई. उसकी तरफ से आशा भोसले की मौत की खबर दिखाने वाले जियो न्यूज को नोटिस भेजा गया है. सवाल उठता है आखिर क्यों? आशा भोसले तो गायिका थीं. उनके गीतों को तो हर कोई गुनगुनाता था. वैसे ही जैसे यहां भारत में गुलाम अली को सुना जाता है. हर कोई उनकी आवाज कद्रदान है. आशा भोसले की आवाज में ऐसा जादू था कि तनाव में बैठा आदमी भी एक पल को उनके गीतों को सुनकर चैन पा जाए. फिर उनकी मौत की खबर दिखाने और बताने पर पाकिस्तान सरकार ने नोटिस क्यों भेजा? 

ईरान-अमेरिका में शांति वार्ता का मेजबान बनकर फील्ड मार्शल असीम मुनीर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से लेकर उप-प्रधानमंत्री इशाक डार के लिए नोबल पीस प्राइज मांगने वालों को भी शायद पाकिस्तानी हुक्मरानों का ये चेहरा पसंद नहीं आएगा. ऐसे शांति दूतों के रहते एक स्वर कोकिला आशा भोसले की मौत की खबर पर बैन लगाना उनकी असलियत बताता है. आशा भोसले का जीवन तो प्यार भरे गीत गाते हुए बीत गया. उन्होंने तो कभी नफरत वाली बात भी नहीं की. यही कारण है कि जियो न्यूज ने आम पाकिस्तानियों के दिल को समझते हुए उनकी मौत की खबर की कवरेज की, मगर पाकिस्तान के हुक्मरानों को इससे क्या? 

नोटिस में क्या लिखा है

जियो न्यूज के प्रबंध निदेशक और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संपादकों और समाचार निदेशकों के संघ के अध्यक्ष अजहर अब्बास ने X पर यह खबर साझा की. उन्होंने लिखा, “प्रतिष्ठित कलाकारों के बारे में रिपोर्टिंग करते समय उनके कार्यों को याद करना और उनका सम्मान करना हमेशा से हमारी परंपरा रही है. वास्तव में, आशा भोसले जैसी महान कलाकार के लिए, हमें उनके और भी सदाबहार और यादगार गाने साझा करने चाहिए थे, जितने हमने किए, लेकिन पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक, पेमरा ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है.”

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रविवार को जारी पेमरा नोटिस में जियो न्यूज द्वारा भोसले के निधन की खबर के साथ-साथ भारतीय गाने और फिल्मों के दृश्य प्रसारित करने को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का जानबूझकर उल्लंघन बताया गया है, जिसमें भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया है. 2018 में, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने देश के टीवी चैनलों पर भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध को फिर से लागू कर दिया था. इसमें कहा गया है कि जियो का प्रसारण पेमरा अध्यादेश, 2002 की धारा 20 (एफ) का उल्लंघन था, जैसा कि पेमरा (संशोधन) अधिनियम 2023 द्वारा संशोधित किया गया है, जो चैनलों को प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित कार्यक्रमों और विज्ञापनों के कोड का पालन करने और प्राधिकरण को सूचित करते हुए, कोड के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एक आंतरिक निगरानी समिति नियुक्त करने के लिए बाध्य करता है.

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