अब पाकिस्तान-इजरायल में ठन गई! क्या PAK इस्लामिक मुल्कों का खलीफा बनने का सपना देख रहा है?

ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में वार्ता के पहले पाकिस्तान के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक पोस्ट में इजरायल की आलोचना करते हुए उसे दुष्ट और मानवता के लिए शाप बताया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह बयान इस्लामिक देशों के बीच 'खलीफा' जैसी नेतृत्वकारी छवि बनाने की कोशिश है?

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  • ख्वाजा आसिफ ने इजरायल की कड़ी आलोचना करते हुए उसे मानवता के लिए शाप बताया है और उसके विनाश की बात कही है.
  • यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में वार्ता से पहले आया है, जिससे यह एक रणनीतिक कदम प्रतीत होता है.
  • PAK इस्लामिक देशों में नेतृत्व स्थापित करने की कोशिश कर रहा और कड़े बयान देकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है.
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नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अब पाकिस्तान का नाम भी खुलकर सामने आ गया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान ने न सिर्फ इजरायल बल्कि वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है. ऐसे में सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक बयान है या इसके पीछे कोई सोची-समझी रणनीति छिपी है?

क्या कहा ख्वाजा आसिफ ने?

ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में वार्ता के पहले पाकिस्तान के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक पोस्ट में इजरायल की आलोचना करते हुए उसे दुष्ट और मानवता के लिए शाप बताया है. उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान में वार्ता होने जा रही है, तब इजरायल लेबनान में नरसंहार कर रहा है. पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या की जा रही है. जिन लोगों ने फिलिस्तीनी भूमि पर कैंसर जैसे इस देश की स्थापना की है, वो इन यहूदियों के विनास के लिए काम करें.

यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब खुद पाकिस्तान कई बार खुद को 'मध्यस्थ' के तौर पर पेश करता रहा है.

क्या ये इस्लामिक दुनिया में नेतृत्व की कोशिश?

पाकिस्तान लंबे समय से खुद को इस्लामिक देशों की राजनीति में एक अहम खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहता है. क्या यह बयान इस्लामिक देशों के बीच 'खलीफा' जैसी नेतृत्वकारी छवि बनाने की कोशिश है? सऊदी अरब, तुर्की और ईरान जैसे देशों के बीच पाकिस्तान अपनी जगह मजबूत करना चाहता है. कड़े बयान देकर घरेलू राजनीति में भी समर्थन जुटाना एक फैक्टर हो सकता है.

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टाइमिंग क्यों अहम है?

यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होने जा रही है. क्या पाकिस्तान इस वार्ता से पहले अपनी पोजिशनिंग करना चाहता है? क्या यह संकेत है कि पाकिस्तान खुद को एक 'हार्डलाइन' इस्लामिक आवाज के रूप में पेश कर रहा है? टाइमिंग यह दिखाती है कि यह सिर्फ भावनात्मक बयान नहीं, बल्कि रणनीतिक कदम भी हो सकता है.

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मध्यस्थ या पक्षकार?

पाकिस्तान कई मौकों पर खुद को मिडिल ईस्ट के मुद्दों में मध्यस्थ बताता रहा है. लेकिन अगर वही देश किसी एक पक्ष के विनाश की बात करे, तो उसकी न्यूट्रल छवि कमजोर पड़ती है. इससे यह संकेत जाता है कि पाकिस्तान अब खुलकर एक पक्ष के साथ खड़ा है.

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ख्वाजा आसिफ का बयान सुन भड़क उठे नेतन्याहू

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का भड़काऊ बयान सुनने के बाद बेंजामिन नेतन्याहू भी बुरी तरह भड़के हुए हैं. उन्होंने साफ शब्दों में पूछा कि एक तरफ तो आप खुद को शांति का निष्पक्ष मध्यस्थ होंगे का दावा करते हैं और दूसरी तरफ इजरायल के विनाश की बात कर रहे हैं. ये कैसी मध्यस्थता है. 

यह पूरा घटनाक्रम कई सवाल खड़े करता है. क्या पाकिस्तान वैश्विक मंच पर अपनी नई भूमिका तय कर रहा है? क्या यह बयान घरेलू राजनीति के लिए है या अंतरराष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा? और सबसे अहम बात ये है कि क्या इससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ेगा? साफ है, यह सिर्फ एक बयान नहीं… बल्कि उस बड़े खेल का हिस्सा हो सकता है, जिसमें पाकिस्तान अपनी नई पहचान गढ़ने की कोशिश कर रहा है.

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