- ईरान ने इजरायल के दक्षिणी इलाकों डिमोना और अराद में मिसाइल हमले कर कई इमारतों को नुकसान पहुंचाया है.
- अराद में 84 और डिमोना में 33 लोग घायल हुए, जिनमें गंभीर रूप से घायल बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं.
- सामने आए वीडियो में आसमान से एक मिसाइल गिरती नजर आ रही है और इसके बाद जोरदार धमाका होता है.
ईरान और इजरायल के बीच जारी टकराव और तेज हो गया है. ईरान ने इजरायल के दक्षिणी इलाकों में मिसाइल हमले किए हैं, जिनमें डिमोना और अराद शहर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में आसमान से एक आग का गोला गिरता नजर आ रहा है और इसके बाद जोरदार धमाका होता है. इन हमलों में कई इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं और घरों के दरवाजे‑खिड़कियां पत्तों की तरह टूटकर गिर गए. ईरान ने अपने नतान्ज परमाणु संवर्धन स्थल को निशाना बनाए जाने के बाद यह हमले किए.
ईरान की ओर से शनिवार रात को किए गए हमले में कई इमारतें मलबे और धूल में तब्दील हो गई. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें मिसाइल हमले के समय लोगों को अपने घरों के अंदर सहमते दिखाया गया है. वीडियो में दरवाजे और खिड़कियों के फ्रेम टूटते नजर आ रहे हैं और घरों में सामान इधर-उधर बिखर जाता है. हालांकि अभी तक इस तरह के वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है.
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अराद में 84 और डिमोना में 22 जख्मी
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अराद शहर में 84 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 10 की हालत गंभीर बताई जा रही है. वहीं डिमोना में 33 लोग जख्मी हुए हैं. घायलों में एक 10 साल का बच्चा भी शामिल है, जिसे छर्रे लगने से गंभीर चोटें आई हैं, जबकि एक 40 वर्षीय महिला भी गंभीर रूप से घायल हुई है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमलों को बेहद कठिन रात करार देते हुए कहा कि अराद और डिमोना में अतिरिक्त आपातकालीन दल भेजे जा रहे हैं. उन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का भी संकेत दिया है. दूसरी ओर, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि डिमोना जैसे भारी सुरक्षा वाले इलाके में मिसाइलों का पहुंचना इस संघर्ष के एक नए चरण की शुरुआत की संकेत है.
न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर से 20 किमी दूर हमला
इन हमलों को इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि डिमोना इजरायल के मुख्य परमाणु अनुसंधान केंद्र से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने साफ किया है कि इजरायल के किसी भी संवेदनशील परमाणु ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचा है और इलाके में किसी तरह का रेडिएशन असामान्य स्तर पर नहीं पाया गया है. 1958 से ही नेग्रेव रेगिस्तान में स्थित इजरायल का मुख्य न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर डिमोना शहर में है.
ईरान के नतान्ज सुविधा केंद्र में भूमिगत सेंट्रीफ्यूज हैं, जिनका उपयोग ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम संवर्धन में किया जाता है और जून 2025 के युद्ध में इसे नुकसान पहुंचा था.
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कहा कि बलों ने दक्षिणी इजरायल के अन्य शहरों के साथ-साथ कुवैत और यूएई में भी सैन्य स्थलों को भी निशाना बनाया.














