तबाही के कगार पर खड़ा है पाकिस्‍तान? जीडीपी के 70% के पार पहुंचा कर्ज

आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि हर पाकिस्तानी नागरिक पर कर्ज का बोझ 13 प्रतिशत बढ़कर करीब 3.33 लाख रुपये हो गया है. वहीं देश के बजट में रक्षा खर्च को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • पाकिस्तान का सार्वजनिक कर्ज सकल घरेलू उत्पाद के 70 प्रतिशत से अधिक हो गया है जो आर्थिक संकट का संकेत है.
  • वित्त मंत्रालय ने बताया कि ऊंची ब्याज दरें और मुद्रा विनिमय में उतार-चढ़ाव कर्ज बढ़ने के मुख्य कारण हैं.
  • हर पाकिस्तानी नागरिक पर कर्ज का बोझ 13 प्रतिशत बढ़कर करीब 3.33 लाख रुपये तक पहुंच गया है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

पाकिस्तान के आर्थिक हालात बेहद खराब हैं. देश का सार्वजनिक कर्ज सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 70 प्रतिशत के पार चला गया है, जबकि वित्तीय घाटा तय सीमा से काफी अधिक है. पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि बीते वित्त वर्ष में सार्वजनिक कर्ज की स्थिति एक बड़ी चुनौती बनी रही है. वित्त मंत्रालय के अनुसार, कर्ज में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ऊंची ब्याज दरों और मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव की वजह से हुई है. कराची स्थित एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने यह खबर दी है.

वित्त मंत्रालय के अनुसार, जून 2024 से जून 2025 के बीच पाकिस्तान का कुल सार्वजनिक कर्ज 71.2 ट्रिलियन रुपये (पाकिस्‍तानी रुपये) से बढ़कर 80.5 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया. इसी अवधि में कर्ज का जीडीपी के मुकाबले अनुपात 67.6 प्रतिशत से बढ़कर 70.7 प्रतिशत हो गया. 

ये भी पढ़ें: पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी सोच का पता दे रही ये ट्रैवल एडवाइजरी, जानें अपने नागरिकों से क्या कहा

हर शख्‍स पर 3.33 लाख रुपये का कर्ज 

आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि हर पाकिस्तानी नागरिक पर कर्ज का बोझ 13 प्रतिशत बढ़कर करीब 3.33 लाख रुपये हो गया है. संसद में पेश फिस्कल पॉलिसी स्टेटमेंट के मुताबिक, बजट घाटा कानूनी सीमा से 3 ट्रिलियन रुपये अधिक रहा है, जिससे वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़े हुए हैं. 

रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि देश के बजट में रक्षा खर्च को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जबकि सामाजिक कल्याण और विकास कार्यों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया.

ये भी पढ़ें: नए दौर में बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान के रिश्‍ते, 14 साल बाद फिर शुरू हुई सीधी फ्लाइट

Advertisement

आवंटन से ज्‍यादा हो गया रक्षा खर्च

विकास मद में जहां 1.7 ट्रिलियन रुपये का प्रावधान था, वहीं वास्तविक खर्च केवल 1.4 ट्रिलियन रुपये रहा. इसके विपरीत, रक्षा क्षेत्र में तय बजट से अधिक करीब 2.2 ट्रिलियन रुपये खर्च किए गए. हालांकि रक्षा व्यय का बजट 2.1 ट्रिलियन रुपये निर्धारित किया गया था.  

वित्त वर्ष 2024-25 प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार का पहला पूर्ण कार्यकाल रहा. इस दौरान सरकार ने कटौती के दावे किए, लेकिन नए विभाग बनाए गए, मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और सरकारी सुविधाओं पर खर्च किया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता कर्ज और सीमाओं से बाहर जाता घाटा सरकार के वित्तीय अनुशासन के दावों को कमजोर करता है. 

Advertisement
Featured Video Of The Day
Iran Israel War | अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़ा हवाई हमला | Trump | Mojtaba Khamenei | BREAKING
Topics mentioned in this article