- ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल सीजफायर है लेकिन दोनों पक्षों में झुकाव नहीं होने से संघर्ष फिर शुरू हो सकता है.
- मैन-पोर्टेबल डिफेंस सिस्टम ने अमेरिकी स्टेल्थ जेट्स की ताकत पर सवाल खड़े किए.
- इस हथियार ने F-15E और A-10 जैसे विमानों को निशाना बनाया और अमेरिकी एयर डिफेंस की कमजोरियां उजागर कीं.
ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल सीजफायर है. लेकिन यह टूट भी सकता है. वजह है कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नही है. ईरान का साफ कहना है कि उसके ऊपर कोई शर्त नही थोप सकता. वहीं, इजरायल का कहना है कि उसकी उंगलियां ट्रिगर हैं और अमेरिका भी धमकियों के बीच मिडिल ईस्ट में अपने सैनिकों की तादाद लगातार बढ़ा रहा हैं. इस बीच 40 दिन तक चली जंग में एक बड़ा खुलासा सामने आया है. इस युद्व में कई आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ है. लेकिन एक छोटा हथियार सबसे ज्यादा चर्चा में है. नाम है मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम. शॉर्ट में कहें तो MANPADs.
अब हथियार तो बहुत हैं, फिर इस वाले में खास क्या है ? इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह यह कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल है. इस हथियार ने जंग में ऐसा प्रदर्शन किया है कि इसने अमेरिका के स्टेल्थ जेट्स की ताकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अमेरिका को पहले भरोसा था कि उसके विमान रडार से बच सकते हैं. लेकिन इस मिसाइल ने उस भरोसे को तोड़ दिया है. खबरों के मुताबिक इसी ने F-15E और A-10 जैसे विमान गिराए गए. इसके अलावा कुछ सपोर्ट एयरक्राफ्ट को भी निशाना बनाया गया.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दावा किया था कि ईरान की एयर डिफेंस खत्म हो चुकी है. उन्होंने रडार सिस्टम तबाह करने की बात भी कही थी. लेकिन अब जमीनी हालात अलग दिख रहे हैं. सबसे ज्यादा चर्चा पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 को लेकर है. इस विमान को अमेरिका की शान माना जाता है. इसे बेहद आधुनिक फाइटर जेट माना जाता है. इसके उन्नत हथियार और सिस्टम्स बिल्कुल आला दर्जे के हैं. यही वजह है कि इस पर हमले की खबर ने सबको चौंका दिया है. अब तक ये पुष्टि नहीं हुई है कि F-35 को ईरान ने किस हथियार से हिट किया.
कोई भी चल सकता है
MANPADs की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी है. इसे एक सैनिक अकेले चला सकता है. इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है. इसे छिपाना भी आसान होता है. यह खासतौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों के लिए खतरनाक है. अगर इसकी रेंज में कोई हेलीकॉप्टर, ड्रोन या फाइटर जेट आए, तो ये उसे मार गिराता है. धीमी रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले विमान इसका आसान निशाना बनते हैं. MANPADs में हथियार के तौर पर कई तरह की मिसाइल्स का इस्तेमाल होता है. कुछ गर्मी यानी इंफ्रारेड सिग्नल पकड़ती हैं. कुछ को सैनिक खुद गाइड करता है. कुछ लेजर की मदद से निशाना बनाती हैं. इनकी रफ्तार बहुत तेज होती है. ये आवाज की गति से भी ज्यादा तेजी से उड़ती हैं. आमतौर पर ये 4 से 5 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं. इसीलिए इनका इस्तेमाल तभी होता है जब विमान बहुत नीचे उड़ रहे हों.
MANPADs बना अमेरिका का सरदर्द
इनका एक बड़ा फायदा यह भी है कि इन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है, क्योंकि ये किसी बड़े रडार सिस्टम पर निर्भर नहीं होतीं. इन्हें कहीं से भी दागा जा सकता है. अफगानिस्तान में ऐसे ही एक हथियार Stinger ने अमेरिका को खूब परेशान किया था. तालिबानी इससे हमला कर के तुरंत गुफाओं में घुस जाते थे. और हालिया रिपोर्ट्स को देखें तो एक बार फिर से MANPADs अमेरिका का सरदर्द बन गए हैं. खबरों के मुताबिक, ईरान को जल्द और MANPADs मिल सकते हैं. संभावना है कि ये चीन से आया होगा. कहा जा रहा है कि किसी तीसरे देश के जरिए सप्लाई हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो अमेरिका के लिए खतरा और बढ़ जाएगा, क्योंकि ऐसी सूरत में अमेरिकी विमान जमीन से 5 किलोमीटर तक की ऊंचाई तक बिल्कुल असुरक्षित होंगे.
सस्ता हथियार, महंगे सिस्टम पर भारी पड़ रहा है
अगर अमेरिका जमीन पर सेना उतारता है, तो उसके लिए जोखिम और बढ़ सकता है. क्योंकि हेलीकॉप्टर और सपोर्ट एयरक्राफ्ट इसका आसान निशाना बन सकते हैं और बिना एयर डिफेंस खत्म किए आगे बढ़ना, अमेरिका को काफी भारी पड़ सकता है. रक्षा विशेषज्ञ इसे असिमेट्रिक वारफेयर का उदाहरण मानते हैं. मतलब सस्ता हथियार, महंगे सिस्टम पर भारी पड़ रहा है. एक फाइटर जेट बनाने में करोड़ों डॉलर खर्च होते हैं जबकि MANPADs की कीमत काफी कम होती है. फिर भी यह बड़े नुकसान पहुंचा सकता है. यह घटना एक बड़ा सबक देती है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ बड़े और महंगे हथियार ही सब कुछ नहीं होते. कभी-कभी छोटे और सस्ते हथियार भी खेल बदल देते हैं.
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