ईरान हिंसा के बीच देखें अंतिम शाह रजा पहलवी और पूर्व सुप्रीम लीडर रुहोल्लाह खामेनेई के घर की इनसाइट ग्राउंड रिपोर्ट

एक तरफ शाह का आलीशान, पश्चिमी शैली का, आधुनिकता और वैभव से भरा जीवन; दूसरी तरफ खामनेई का जमीन से जुड़ा, बेहद साधारण और सादा जीवन. यही विरोधाभास 1979 की ईरानी क्रांति का मूल था.

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  • ईरान में दो सप्ताह से विरोध-प्रदर्शन जारी हैं जिनमें 544 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों गिरफ्तार हुए हैं.
  • अंतिम शाह रजा पहलवी का घर अत्यधिक भव्य था जिसमें आलीशान महल, विशाल बगीचा और महंगे संग्रह शामिल थे.
  • आयतुल्लाह खामेनेई का घर सादगी और जनभावनाओं से जुड़ा था जो ईरानी आम जनता के जीवनशैली को दर्शाता है.
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ईरान में इस समय भीषण विरोध-प्रदर्शन का दौर जारी है. बीते दो सप्ताह से जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच ईरान में 544 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हजारों लोग हिरासत में रखे गए हैं. विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोग सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की सत्ता को चुनौती दे रहे हैं. ईरान में भड़की इस हिंसा के बीच NDTV पर देखिए ईरान के अंतिम शाह रजा पहलवी और ईरान में इस्लामिक क्रांति लाने वाले आयतुल्लाह रुहोल्लाह खामेनेई के घर के ग्राउंड रिपोर्ट.

तेहरान में रजा पहलवी और रुहोल्लाह खामेनेई का घर से ग्राउंड रिपोर्ट

ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित इन दोनों का घर आज भी खामोशी के साथ उस इतिहास की गवाही देते हैं, जिसने पूरे राष्ट्र की दिशा बदल दी. दरअसल एनडीटीवी ने ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी, और उनके विरोध में क्रांति लाने वाले आयतुल्लाह रुहोल्लाह खामेनेई के घर का दौरा किया था. आज ईरान में भड़की हिंसा के बीच इस रिपोर्ट देखना मौजूं हो गया है.

इन दोनों स्थानों पर पहुंचना ऐसा था मानो ईरान के इतिहास के दो सिरे एक साथ सामने खड़े हों—एक ओर शाही वैभव और विलासिता का प्रतीक, और दूसरी ओर सादगी, फक्कड़पन और जनभावनाओं से गहरे जुड़ाव का चिन्ह. दोनों घर न सिर्फ दो व्यक्तित्वों के रहने की जगह थे, बल्कि दो बिलकुल विपरीत विचारधाराओं, जीवनदर्शन, और जनता से उनके रिश्ते का आईना भी थे.

शाह का महल: वैभव, आधुनिकता और ‘पुराने दौर की चमक' का प्रतीक

मोहम्मद रज़ा पहलवी का घर किसी आलीशान महल से कम नहीं था. एक विशाल, सुगढ़ बगीचा ऊँची छतों और बड़े कमरों वाले इस घर को घेरे हुए था. कांच से बना इतना चौड़ा मुख्य दरवाज़ा कि चार लोग एक साथ आराम से अंदर आ सकें, घर में घुसते ही उस वैभव की झलक दिखा देता था, जिसके लिए पहलवी परिवार जाना जाता था.

बाहरी दीवारों पर गहरे नीले रंग की भित्तिचित्र कला और सुनहरी ईंटें—मानो किसी पाँच सितारा होटल के स्वागत कक्ष का प्रवेशद्वार हो. अंदर रिसेप्शन रूम इतना बड़ा कि किसी छोटे ऑडिटोरियम का अहसास होता था. यही वह जगह थी जहाँ दुनिया भर से आए मेहमान शाह से मिलने का इंतजार करते थे.

डाइनिंग हॉल में एक लंबी मेज़ थी, जिसके आसपास दो दर्जन से अधिक लोग आराम से बैठ सकते थे — यह स्पष्ट करता था कि शाह की मेजबानी भी उनके महल की तरह भव्य थी. शाह के निजी थियेटर ने इस वैभव को और आगे बढ़ाया—चौड़े, आरामदायक सोफे, आधुनिक साउंड सिस्टम, और वह जगह जहाँ शाह अपना समय बिताते थे.

एक हिस्से में कांच की मेज़ों पर दुनिया भर से जुटाई गई दुर्लभ चीजों का संग्रह था. इनमें वह चंद्रमा का पत्थर भी शामिल था, जिसे अमेरिका की ओर से अपोलो मिशन के दौरान पृथ्वी पर लाए गए नमूनों में से शाह को उपहार में दिया गया था—एक प्रतीक के रूप में कि आधुनिक विज्ञान और विश्व राजनीति में ईरान का एक स्थान है.

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शाह की शान में 400 से अधिक कारें और मोटरसाइकिलें थीं — जिनमें से कुछ आज भी प्रदर्शनी में मौजूद हैं, जिनमें एक आकर्षक स्पोर्ट्स कार भी दिखती है.

खामेनेई का घर: सादगी, सच्चाई और जनभावनाओं से बने पुल का प्रतीक

शाह के भव्य घर के बाद जब खोमैनी के घर में कदम रखते हैं, तो मानो किसी दूसरे ही संसार में चले जाते हैं. यह घर किसी आम ईरानी नागरिक के साधारण शहर वाले घर जैसा ही लगता है. घर के बाहर लगी धातु की पट्टिका खोमैनी के जीवन और इस घर के इतिहास का संक्षिप्त विवरण देती है. अंदर बैठक कक्ष में एक साधारण, आयताकार सोफ़ा—यही वह जगह थी जहाँ खोमैनी बैठते थे और जनता उनसे मुलाकात करती थी.

एक कांच की अलमारी में रखा उनका पुराना छाता भी वहीं सुरक्षित है—यह अलग ही तरह का सादगी का संदेश देता है. घर के साथ जुड़ा हुआ वह छोटा हॉल आज भी अपनी पहचान लिए खड़ा है, जहाँ खोमैनी अपने भाषण देते थे. अंदरूनी सजावट मस्जिद जैसी—सादा, बिना किसी चमक-दमक के, केवल एक ऊँचा मंच और सामने की ज़मीन पर बैठी जनता. खोमैनी इसी मंच से क्रांतिकारी विचार रखते थे, और जनता उन्हें ध्यान से सुनती थी.

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दीवारें आज भी बिना रंग-रोगन के, समय के साथ फीकी पड़ चुकी हैं. मरम्मत का काम शायद जानबूझकर नहीं किया गया, ताकि वही मौलिक स्वरूप बना रहे जिसने खामनेई के जनसंख्या से गहरे संबंध की कहानी को विरासत में संभाल रखा है.

खामनेई का यह घर बताता है कि क्यों और कैसे वह आम जनता—खासकर गरीबों और शाह के शासन से परेशान वर्ग—के दिलों में उतर गए. यही सादगी और लोगों से जुड़ाव उस क्रांति की नींव बना जिसने 1979 में पूरे ईरान के इतिहास को बदल दिया.

दो घर, एक कहानी—ईरान की क्रांति का असली चेहरा

इन दोनों घरों को अपनी आंखों से देखना मानो ईरान के दो अलग-अलग युगों का सामने आना है— एक तरफ शाह का आलीशान, पश्चिमी शैली का, आधुनिकता और वैभव से भरा जीवन; दूसरी तरफ खामनेई का जमीन से जुड़ा, बेहद साधारण और सादा जीवन. यही विरोधाभास 1979 की ईरानी क्रांति का मूल था—एक तरफ चमकता सत्ता का ताज, और दूसरी तरफ वह आदमी जो जनता के बीच बैठकर बातें करता था.

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अब भी जब कोई इन दोनों घरों का दौरा करता है, तो ईरान की उस लंबी राजनीतिक यात्रा की परतें अपने आप खुलती चली जाती हैं, जिसने एक सम्राट के शासन का अंत और एक धार्मिक नेतृत्व की स्थापना का इतिहास रचा. दो घरों की यह कहानी सिर्फ वास्तुकला की कहानी नहीं—यह सत्ता, जनता, संघर्ष और क्रांति की कहानी है. और यह हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी इतिहास को बदलने के लिए सिर्फ विचारधाराएँ नहीं, बल्कि नेता का जीवन जीने का तरीका भी बहुत मायने रखता है.

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