ईरान के खिलाफ एक महीने से जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई मारे गए हैं. लेकिन ट्रंप के दावे के बीच मुजतबा एक के बाद एक नए लिखित संदेश जारी कर रहे हैं. ईरान के नए सुप्रीम लीडर ने एक लिखित संदेश में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध में समर्थन देने के लिए इराक की जनता का धन्यवाद किया है. यह जानकारी रविवार को ईरानी मीडिया ने दी.
मोजतबा खामेनेई पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे हैं और खुद सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद से अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं. उन्होंने अब तक केवल लिखित बयान ही जारी किए हैं. उनके पिता अली खामेनेई की 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत में पहले ही दिन एक हवाई हमले में मौत हो गई थी. मुजतबा का सार्वजनिक रूप से सामने न आना उनकी हालत और ठिकाने को लेकर काफी अटकलों को जन्म दे रहा है. हालांकि सरकारी टेलीविजन और कुछ ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे एक हवाई हमले में लगी चोटों से उबर रहे हैं.
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मुजतबा का नया संदेश
समाचार एजेंसी आईएसएनए के अनुसार अपने संदेश में खामेनेई ने ईरान के खिलाफ आक्रामकता के विरोध में स्पष्ट रुख अपनाने और हमारे देश का समर्थन करने के लिए इराक की सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकरण और इराक की जनता के प्रति अपनी सराहना व्यक्त की है. यहां इराक के महान आयतुल्लाह अली सिस्तानी का उल्लेख किया गया है, जो शिया इस्लाम की सबसे सम्मानित हस्तियों में से एक हैं.
यह संदेश इस्लामिक सुप्रीम काउंसिल ऑफ इराक (एक शिया राजनीतिक पार्टी) और बगदाद में ईरान के राजदूत के बीच हुई बैठक के बाद भेजा गया था. हालांकि यह नहीं बताया गया कि यह संदेश किस तरीके से पहुंचाया गया.
सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद से मुजतबा खामेनेई ने एक पहला आधिकारिक बयान और फिर फारसी नववर्ष नौरोज के अवसर पर एक संदेश जारी किया था. दोनों बयान टेलीविजन पर किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा पढ़कर सुनाए गए और उनमें युद्ध में जीत की भविष्यवाणी करते हुए दृढ़ रुख दिखाया गया.
वहीं ईरान का सरकारी मीडिया अक्सर मुजतबा खामेनेई की तस्वीरें प्रकाशित करता रहता है, लेकिन यह नहीं बताता कि वे नई तस्वीरें हैं या नहीं. मुजतबा के अपने आधिकारिक टेलीग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट भी हैं. मुजतबा खामेनेई 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर हैं. उन्होंने अपने पिता अली खामेनेई और क्रांति के संस्थापक आयतुल्लाह रुहोल्लाह खोमेनी के बाद यह पद संभाला है.














