ईरान ने जनवरी प्रोटेस्ट के दोषी 18 वर्षीय युवक को दी सजा-ए-मौत, 14 दिन में चौथी फांसी

ईरान में दिसंबर-जनवरी में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में इससे पहले 19 मार्च को तीन लोगों को फांसी पर चढ़ाया गया था, जिनमें इंटरनेशनल लेवल का 19 वर्षीय रेसलर सालेह मोहम्मदी भी था.

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ईरान में जनवरी के महीने में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े एक युवक को गुरुवार को फांसी पर चढ़ा दिया गया. 18 साल के अमीर हुसैन हातमी को ईरान की राजधानी तेहरान में एक प्रतिबंधित सैन्य ठिकाने में घुसने का दोषी ठहराया गया था. उस पर आगजनी करने और हथियार गोला बारूद कब्जाने की कोशिश का भी आरोप था. 

ईरान में न्यायपालिका से जुड़े न्यूज पोर्टल मिजान के मुताबिक, हातमी को फांसी पर चढ़ाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट से उसकी अपील खारिज होने के बाद लिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए उसे फांसी की सजा देने का आदेश दिया था. दावा किया गया है कि हातमी ने इजरायल और अमेरिका के बहकावे में आकर ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम किया था. 

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जुडिशरी के पहले डिप्टी चीफ हम्जेह खलीली ने पिछले महीने ही संकेत दिए थे कि जनवरी के आंदोलन से जुड़े मुकदमों को अंतिम रूप दे दिया गया है. अब अदालत के फैसलों और सजाओं को लागू किया जा रहा है. मिजान के मुताबिक, हातमी ने अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया था. 

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ईरान में दिसंबर-जनवरी में हुए प्रदर्शनों से संबंधित अपराधों में यह चौथी फांसी है. इससे पहले, 19 मार्च को तीन लोगों को सजा ए मौत दी गई थी. उनमें इंटरनेशनल लेवल का 19 वर्षीय रेसलर सालेह मोहम्मदी भी शामिल था. इन तीनों पर प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मी की हत्या का आरोप था. 

अल मॉनिटर की खबर के मुताबिक, इस हफ्ते ईरानी अधिकारियों ने 4 लोगों को सूली पर चढ़ाया था. इन पर प्रतिबंधित संगठन मुजाहिदीन ऑफ ईरान का सदस्य बनकर विद्रोह करने का आरोप साबित हुआ था. 

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बता दें कि ईरान में दिसंबर-जनवरी के महीने में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए थे. उस वक्त के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की नीतियों से नाराजगी और महंगाई जैसी समस्याओं से भड़के ईरानी नागरिक भारी संख्या में सड़कों पर उतरे थे. इनमें युवाओं की संख्या काफी थी. 8-9 जनवरी को यह प्रदर्शन अपने चरम पर था. उसके बाद ईरान सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनों को दबा दिया था. 

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