'झुकना होता, तो बहुत पहले ही झुक चुके होते', ट्रंप की धमकी पर भारत में ईरान के कॉन्सुल जनरल बोले

भारत में ईरान के कॉन्सुल जनरल सईद रेजा मोसयेब मोतलघ ने कहा कि सबसे पहली बात, सभ्यताएं इस तरह खत्म नहीं होतीं. इस तरह का बयान देना राष्ट्रपति ट्रंप की अज्ञानता को दर्शाता है. माया सभ्यता समेत दुनिया की कई प्राचीन सभ्यताएं आज भी किसी न किसी रूप में जीवित हैं. उनके अवशेष, उनकी विरासत और उनका सांस्कृतिक प्रभाव आज भी मौजूद है.

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  • अमेरिका-ईरान के बीच तनाव चरम पर है,.ट्रंप की अल्टीमेटम की समय सीमा समाप्त होने में कुछ घंटे शेष हैं.
  • ईरान के कॉन्सुल जनरल ने ट्रंप के मानसिक संतुलन और उनकी धमकियों पर तीखा प्रहार करते हुए प्रतिक्रिया दी है.
  • ईरान ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी दबाव में नहीं आएंगे और डटकर खड़े रहने का फैसला किया है.
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए अल्टीमेटम की समय-सीमा समाप्त होने में अब कुछ ही घंटे शेष हैं. दोनों देशों के बीच युद्ध टालने के लिए चल रही बातचीत की कोशिशें 'कभी हां, कभी ना' के अनिश्चित दौर से गुजर रही हैं, जबकि इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को 'समूल विनाश' की कड़ी चेतावनी दे दी है. इस गंभीर स्थिति पर भारत में ईरान के कॉन्सुल जनरल सईद रेजा मोसयेब मोतलघ ने NDTV से एक्सक्लूसिव की. उन्होंने बेहद कड़े और तल्ख लहजे में ट्रंप की धमकियों पर पलटवार करते हुए यहां तक कह दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है. 

सवाल: डोनाल्ड ट्रंप के उस हालिया बयान पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि “आज रात एक पूरी सभ्यता समाप्त हो जाएगी”?

भारत में ईरान के कॉन्सुल जनरल सईद रेजा मोसयेब मोतलघ ने कहा कि सबसे पहली बात, सभ्यताएं इस तरह खत्म नहीं होतीं. इस तरह का बयान देना राष्ट्रपति ट्रंप की अज्ञानता को दर्शाता है. माया सभ्यता समेत दुनिया की कई प्राचीन सभ्यताएं आज भी किसी न किसी रूप में जीवित हैं. उनके अवशेष, उनकी विरासत और उनका सांस्कृतिक प्रभाव आज भी मौजूद है. दूसरी बात, यह बयान ईरान के लोगों और ईरानी संस्कृति के प्रति ट्रंप की दुश्मनी को साफ तौर पर दर्शाता है. तीसरी बात, इससे ईरान के सामने उनकी कमजोरी और अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल न कर पाने की विफलता उजागर होती है. यह साफ संकेत है कि वे अपने शुरुआती उद्देश्यों में पूरी तरह असफल रहे हैं. चौथी और सबसे गंभीर बात यह है कि एक बड़े देश के राष्ट्रपति के रूप में उनके मानसिक संतुलन पर भी सवाल खड़े होते हैं. जब वे असफल होते हैं, तो शांत और तर्कसंगत फैसले लेने के बजाय गुस्से और हठधर्मिता के जरिये स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं.

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सवाल: ट्रंप की दी गई डेडलाइन कुछ ही घंटों में खत्म हो रही है. उनकी मांगों पर ईरान का क्या रुख है?

भारत में ईरान के कॉन्सुल जनरल सईद रेजा मोसयेब मोतलघ ने कहा कि अगर हमें ट्रंप की धमकियों के आगे झुकना ही होता, तो हम बहुत पहले ही झुक चुके होते. एक बार जब हमने डटकर खड़े रहने का फैसला कर लिया, तो अब हम उसी फैसले पर पूरी तरह कायम रहेंगे. युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक, करीब 40 दिनों में, उन्होंने लगातार धमकियां दी हैं और जो कुछ भी कर सकते थे, वह सब कर चुके हैं. इसके बावजूद हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि हम हर तरह से जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

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सवाल: युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की क्या शर्तें हैं?

भारत में ईरान के कॉन्सुल जनरल सईद रेजा मोसयेब मोतलघ ने कहा कि ईरान की शर्तें हमारे वरिष्ठ अधिकारी तय करेंगे और उचित समय पर उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा. हालांकि, सामान्य तौर पर यह समझा जा सकता है कि युद्ध के अंतिम और गारंटी के साथ अंत, अब तक हुए नुकसान की भरपाई और अन्य आवश्यक शर्तें इसमें शामिल होंगी.

सवाल: खार्ग द्वीप पर हमलों की खबरें हैं. ईरान के तेल निर्यात के लिए इसकी अहमियत को देखते हुए, क्या इससे किसी समझौते की मजबूरी बन सकती है?

भारत में ईरान के कॉन्सुल जनरल सईद रेजा मोसयेब मोतलघ ने कहा कि जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूं, ईरानी जनता को किसी भी समझौते के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब तक कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की तार्किक और वैध मांगें पूरी न की जाएं.

सवाल: ईरान का मानना है कि जमीनी सैन्य कार्रवाई की कोशिश हो चुकी है या फिर दोबारा हो सकती है. इस पर आपकी क्या राय है?

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सईद रेजा मोसयेब मोतलघ ने कहा कि हालिया युद्ध की शुरुआत से ही अलग‑अलग तरीकों से ईरान में जमीनी घुसपैठ की कोशिश की गई है. लेकिन बेहतर योजना और पूरी तैयारी के चलते इन सभी कोशिशों को नाकाम कर दिया गया. अगर वे फिर भी इस पर जोर देते हैं, तो मैं साफ शब्दों में कहना चाहता हूं कि हम पूरी तरह तैयार हैं.

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