ईरान में 'मुजतबा युग' का आगाज, क्या हैं जूनियर खामेनेई की ताकत, चुनौतियां और नेटवर्क

ईरान की सत्ता का असली आधार रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) हैं. मुजतबा ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान 'हबीब इब्न मजा हिर बटालियन' में सेवाएं दी थीं, जहां से उनके सैन्य संबंध मजबूत हुए. आज IRGC के पूर्व और वर्तमान दिग्गज उनके करीबी साथी हैं. इसके अलावा, बासिज मिलिशिया उनके सुरक्षा कवच की तरह है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • ईरान की सत्ता तक मुजतबा खामेनेई का पहुंचना ईरान की क्रांतिकारी पहचान की एक नई परीक्षा है
  • मुजतबा की नियुक्ति ईरान की विचारधारा और व्यावहारिकता के बीच गहरे तनाव का प्रतीक मानी जा रही है
  • रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और बासिज मिलिशिया मुजतबा की सत्ता को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

इतिहास गवाह है कि सत्ता का परिवर्तन अक्सर विरासत के भारी बोझ के साथ आता है, और इस मामले में ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक जैसी जटिल विरासत शायद ही दुनिया में कहीं और हो. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई के शासन के शिखर तक पहुंचने की कहानी मध्य पूर्व की राजनीति में डर और जिज्ञासा दोनों पैदा कर रही है. यह केवल एक पद का हस्तांतरण नहीं है, बल्कि ईरान की क्रांतिकारी पहचान की एक नई परीक्षा है.

विचारधारा बनाम व्यावहारिकता

मुजतबा की नियुक्ति विचारधारा और व्यावहारिकता के बीच एक गहरे तनाव का प्रतीक है. ईरान का इस्लामिक रिपब्लिक राजशाही की राख से उपजा है, जिसका उद्देश्य वंशवादी वर्चस्व को त्यागकर 'विलायत-ए फकीह' (मौलवियों का शासन) के सिद्धांत को अपनाना था. आज सत्ता के साथ जुड़े 'खून के रिश्ते' उन सिद्धांतों को चुनौती दे रहे हैं जिन्होंने इस गणराज्य को जन्म दिया था. कई लोगों के लिए यह क्रांतिकारी भावना के साथ विश्वासघात है, जबकि समर्थकों के लिए यह निरंतरता और स्थिरता का जरिया है.

शहीद का बेटाः मुजतबा खामेनेई

शिया धर्म की आधारशिला 'शहादत' अब मुजतबा खामेनेई के लिए एक सुरक्षा कवच बन गई है. ईरान की राजनीति में शहादत का गहरा स्थान है, और 'विदेशी हमलावरों' के हाथों पिता की मौत ने मुजतबा को 'शहीद के बेटे' के रूप में पेश किया है. यह छवि उन्हें संकट के समय जनता को एकजुट करने और विरोधियों के सामने एक नैतिक अधिकार प्रदान करती है. वह इस प्रतीकवाद का उपयोग अपनी सत्ता को वैध ठहराने के लिए प्रभावी ढंग से कर रहे हैं.

देखें- ईरान युद्ध पर 10 दिन में 10 बार बदले बयान, आखिर ट्रंप चाहते क्या हैं? देखें पूरी टाइमलाइन

मुजतबा के तीन सबसे बड़ी ताकत

मुजतबा ने दशकों तक पर्दे के पीछे रहकर ईरानी समाज के तीन सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है:

Advertisement
  • मौलवी वर्ग: कुम के मदरसों में शिया कानूनी शिक्षा (बहथ अल-खारीज) के माध्यम से उन्होंने धार्मिक जगत में अपनी स्वीकार्यता बनाई है.
  • सुरक्षा बल: वह IRGC और खुफिया सेवाओं के शीर्ष अधिकारियों के बेहद करीब हैं, जो सत्ता की असली चाबी रखते हैं.
  • राजनीतिक और वित्तीय नेटवर्क: सर्वोच्च नेता के कार्यालय के इर्द-गिर्द उन्होंने एक ऐसा राजनीतिक ढांचा तैयार किया है जो प्रशासन और अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण रखता है.

IRGC, बासिज का सुरक्षा कवच

ईरान की सत्ता का असली आधार 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) है. मुजतबा ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान 'हबीब इब्न मजा हिर बटालियन' में सेवा दी थी, जहां से उनके सैन्य संबंध मजबूत हुए. आज IRGC के पूर्व और वर्तमान दिग्गज उनके करीबी साथी हैं. इसके अलावा, बासिज मिलिशिया, जो आंतरिक सुरक्षा और नैतिक पुलिसिंग का काम करती है, मुजतबा के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है. 6 लाख की सक्रिय सदस्यों वाली यह फौज किसी भी आंतरिक असंतोष या विद्रोह को दबाने के लिए मुजतबा का सबसे बड़ा हथियार है.

मुजतबा के सामने चुनौतियां 

मुजतबा के लिए भविष्य की राह आसान नहीं है. उनके सामने जर्जर बुनियादी ढांचा, कड़े आर्थिक प्रतिबंध, आंतरिक विरोध और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी बड़ी बाधाएं हैं. मुजतबा को एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है जो शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं या इंटरव्यू देते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी यह रहस्यमयी छवि उन्हें एक चतुर रणनीतिकार बनाती है जो पर्दे के पीछे से जटिल गठबंधन बनाने में माहिर है.

Advertisement

मुजतबा जहां एक तरफ प्रतिरोध के स्तंभ माने जाते हैं, वहीं वह जानते हैं कि कूटनीति के क्षेत्र में कभी-कभी कट्टरपंथी विचारधारा को व्यावहारिक समझौतों के सामने झुकना पड़ता है. अमेरिका और इजरायल के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच उन्हें संघर्ष और बातचीत के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा.

मुजतबा को एक ऐसी दुनिया में रास्ता बनाना होगा जहां सत्ता की पुरानी छवियां आधुनिक राज्य की मांगों से टकराती हैं. उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कैसे पुराने क्रांतिकारी संकल्प और प्रगति की चाहत रखने वाली नई पीढ़ी के बीच सामंजस्य बिठाते हैं.

Advertisement

देखें- पश्चिम एशिया युद्ध में आगे क्या होगा, 4 संभावनाओं से समझें; भारत पर कितना असर?

Featured Video Of The Day
Gas Cylinder Reality Check: रसोई गैस की कमी है या नहीं? ग्राउंड रिपोर्ट में खुद देखें सच | Top News