अमेरिका Vs ईरानः सैन्य ताकत में कौन कितने पानी में, खामेनेई कैसे कर सकते हैं ट्रंप की नाक में दम?

ईरान में गहराते संकट और हिंसक प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी ने मध्य पूर्व में नए युद्ध की सुगबुगाहट तेज कर दी है.

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  • ईरान में उथलपुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर गंभीरता से विचार की धमकी दी है
  • ईरान ने भी कहा है कि अगर हमला हुआ तो इलाके में मौजूद अमेरिका के सैन्य ठिकाने उसके सीधे निशाने पर होंगे
  • अमेरिका की सैन्य ताकत दुनिया में नंबर वन है, वहीं ईरान के पास अच्छी मिसाइल और ड्रोन क्षमता है
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ईरान में गहराते संकट और हिंसक प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी ने मध्य पूर्व में नए युद्ध की सुगबुगाहट तेज कर दी है. ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिकी सेना ईरान में सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है क्योंकि खामेनेई सरकार ने नागरिकों की हत्या करके रेड लाइन पार करना शुरू कर दिया है. उधर ईरान के नेताओं ने भी कह दिया है कि अगर हमला हुआ तो इलाके में मौजूद अमेरिका और इजराइल के सैन्य ठिकाने सीधे निशाने पर होंगे.     

मध्य-पूर्व में अमेरिका के कितने सैनिक?

दुनिया के देशों में अमेरिकी फौजों की तैनाती समय और जरूरत के हिसाब से बदलती रहती है. अमेरिकी थिंकटैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की जून 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व में अमेरिका के लगभग 40 हजार सैनिक मौजूद हैं. बहुत से सैनिक युद्धपोतों पर मौजूद हैं. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की बात करें तो अमेरिका ने ईरान जैसे देशों को घेरने के लिए रणनीतिक रूप से कई देशों में अपने ठिकाने बना रखे हैं. 

  • मिडिल ईस्ट के देशों में करीब 19 ठिकानों पर अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. 
  • इनमें बहरीन, इजिप्ट, इराक, इजरायल, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, सीरिया और यूएई प्रमुख हैं.
  • लगभग 8 देश ऐसे हैं, जहां अमेरिकी फौजें स्थायी रूप से मौजूद हैं. 
  • कई ठिकानों पर तो पिछले 15 साल से अधिक समय से अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं.
  • कतर में स्थित अल उदेद एयर बेस इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा अड्डा है. 
  • बहरीन में अमेरिकी नेवी का 5वां बेड़ा तैनात है जो समुद्र पर नजर रखता है. 
  • अमेरिकी सेना जिबूती और तुर्की के बड़े बेस का भी इस्तेमाल करती है.

अमेरिका नंबर 1, तो ईरान भी नहीं कम

जब बात अमेरिका और ईरान की सैन्य ताकत की तुलना की आती है तो दोनों का कोई मुकाबला नहीं है. अमेरिका को दुनिया की नंबर वन सैन्य शक्ति माना जाता है, लेकिन ईरान के पास भी ज्यादा नहीं तो कुछ दिनों तक तो अमेरिका की नींद खराब करने लायक हथियार तो है ही. 

ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के मुताबिक, अमेरिका का रक्षा बजट 895 अरब डॉलर के करीब है, उसके करीब 14 लाख एक्टिव सैनिक और 13 हजार से अधिक विमान हैं, जिनमें आधुनिक स्टील्थ फाइटर भी शामिल हैं. वहीं ईरान सैन्य शक्ति के मामले में दुनिया में 16वें स्थान पर आता है और उसका बजट अमेरिका के मुकाबले काफी कम है. ईरान की ताकत उसकी मिसाइलों और ड्रोन क्षमता में है, लेकिन वायुसेना के मामले में वह काफी पीछे है.

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अगर ट्रंप ने हमला किया तो क्या होगा?

जानकारों का मानना है कि ट्रंप के पास ईरान को सबक सिखाने के लिए कई विकल्प हैं, जिनमें काइनेटिक एक्शन (सीधा हमले) से लेकर साइबर अटैक तक शामिल हैं. अगर अमेरिका सीधे सैन्य हमले का विकल्प चुनता है, तो ईरान अपने एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस (जैसे हिजबुल्लाह और हूती) के जरिए पूरे इलाके में अमेरिकी ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाकर ट्रंप की नाक में दम कर सकता है. इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है. युद्ध लंबा खिंचा तो पूरा मिडिल ईस्ट इसकी चपेट में आ सकता है. 

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