अमेरिका में कहां खर्च होगा बढ़े हुए टैरिफ से आने वाला धन,टैरिफ से जुड़े सवाल और उनके जवाब

Trump Liberation Day Tariff Announcement

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नई दिल्ली:

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए विभिन्न देशों पर लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा कर दी है. उन्होंने सभी देशों से आयात पर  10 फीसदी बेसलाइन के साथ टैरिफ की घोषणा की है. उन्होंने 10 से अधिक देशों पर टैरिफ की ऊंची दरें लगाईं हैं. इन देशों का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस है. ट्रंप का कहना है कि उनकी कोशिश टैरिफ के उस अंतर को कम करने की है जो दूसरे देश अमेरिकी उत्पादों के आयात पर लगाते हैं.

ट्रंप की ओर से लगाई गई टैरिफ की ऊंची दरें उन देशों को अधिक प्रभावित करेंगी जो अमेरिका से सामान खरीदन की तुलना में उसे अधिक सामान बेचते हैं. अर्थशास्त्री ट्रंप के टैरिफ के प्रति उत्साह को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं, क्योंकि यह आयात पर लगाया जाने वाला कर है, इसका बोझ आमतौर पर उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता है. अब यह हो सकता है कि रेसिप्रोकल टैरिफ दूसरे देशों को बातचीत की मेज पर लाए और वे अपने आयात करों को कम करें. आइए देखते हैं कि रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर कौन से सवाल हैं और उनके जवाब क्या हैं. 

क्या अमेरिका में वसूला गया टैरिफ जनरल रेवन्यू फंड में जाता है? क्या ट्रंप उस फंड से धन को बिना किसी मंजूरी के निकाल सकते हैं?

टैरिफ आयात पर लगने वाला कर है. इसे विदेशी सामान के अमेरिकी सीमा में आने पर कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी वसूल करती है. इस तरह पिछले साल करीब 80 अरब डॉलर वसूले गए थे. यह धन अमेरिकी खजाने में जाता है. इससे संघीय सरकार के खर्चे पूरे होते हैं. इस धन का इस्तेमाल कैसे होगा, यह तय करने का अधिकार कांग्रेस के पास है. राष्ट्रपति ट्रंप को रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन है. अमेरिकी कांग्रेस के सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में उनका बहुमत है.ट्रंप चाहते हैं कि टैरिफ बढ़ाने से जो धन खजाने में आएगा, उसका इस्तेमाल करों में कटौती से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया जाए. विश्लेषकों का अनुमान है कि ट्रंप की इस कोशिश का फायदा अमीरों को अधिक होगा. ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में हुए टैक्स कट को आगे बढ़ाना चाहते हैं. इस टैक्स कट की समय सीमा इस साल के अंत में खत्म होने वाली है.

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अमेरिका में टैरिफ कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी वसूल करती है.

वॉशिंगटन के दी टैक्स फाउंडेशन नाम के एक थिंक टैंक ने पाया है कि ट्रंप के इस टैक्स कट से 2025 से 2034 के बीच संघीय राजस्व में साढ़े चार ट्रिलियन डॉलर की कमी आएगी. 

ट्रंप टैक्स कलेक्शन की धीमी रफ्तार की भरपाई के लिए अधिक टैरिफ की वकालत कर रहे हैं. टैक्स पॉलिसी सेंटर नाम के एक थिंक टैंक का कहना है कि 2027 के टैक्स कट को आगे बढ़ाने से अमेरिका के हर आय वर्ग के लोगों को फायदा होगा, लेकिन इसका सबसे अधिक फायदा उच्च आय वर्ग के लोगों को होगा. 

टैरिफ पॉलिसी की वजह से कीमतें कितनी जल्दी बढ़ेंगी?

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यह इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिका और दूसरे देशों का कारोबार कैसे प्रतिक्रिया देता है. लेकिन एक आम उपभोक्ता टैरिफ लागू होने के एक-दो महीने में ही कीमतों में बढ़ोतरी देख सकता है. कुछ उत्पादों, जैसे मैक्सिको से आने वाली उपज की कीमतें टैरिफ प्रभावी होने के बाद बहुत तेजी से बढ़ सकती हैं.

कुछ अमेरिकी खुदरा विक्रेता और अन्य आयातक टैरिफ का कुछ हिस्सा खुद वहन कर सकते हैं. वहीं कुछ विदेशी निर्यातक अतिरिक्त शुल्कों की भरपाई के लिए अपनी कीमतों में कमी ला सकते हैं. लेकिन कई व्यवसायों के लिए ट्रंप की ओर से घोषित टैरिफ जैसे यूरोप से आयात पर 20 फीसदी का टैरिफ अपने आप में बहुत अधिक होगा. वहीं कंपनियां कीमतें बढ़ाने के लिए टैरिफ का बहाना बना सकती हैं. कई अध्ययनों से पता चला है कि जब ट्रंप ने 2018 में वाशिंग मशीनों पर शुल्क लगाया था, तो खुदरा विक्रेताओं ने वॉशर और ड्रायर दोनों की कीमतें बढ़ा दीं थीं, जबकि सरकार न ड्रायर पर कोई नया शुल्क नहीं लगाया था.   

अमेरिका में टैरिफ लगाने से होने वाली आय को राष्ट्रपति ट्रंप टैक्स कट से हुए नुकसान की भरपाई के लिए करना चाहते हैं.

ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले महीनों में फिर से कुछ ऐसा होगा. अर्थशास्त्रियों को चिंता इस बात की है कि उपभोक्ता, जो पिछले चार दशक में सबसे अधिक महंगाई से गुजरे हैं, वो कोरोना महामारी से पहले की तुलना में महंगाई के प्रति अधिक अभ्यस्त हो गए हैं. संकेत तो इस बात के भी हैं कि अमेरिकी लोग जीवन-यापन के बढ़ते खर्च से परेशान हैं. वे शायद ही सामान की बढ़ती कीमतों को स्वीकार करें.वो अपने खर्चों में ही कटौती करेंगे. इससे कारोबारी कीमतें बहुत अधिक नहीं बढ़ा पाएंगे. 

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कार्यकारी शाखा के पास टैरिफ लगाने की कितनी शक्ति है? क्या इसमें कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं है?

अमेरिकी संविधान कांग्रेस को टैरिफ निर्धारित करने की शक्ति देता है. लेकिन सालों से कांग्रेस ने कई अलग-अलग कानूनों के जरिए उन शक्तियों को राष्ट्रपति को सौंप दिया है. ये कानून उन परिस्थितियों के बारे में बताते हैं जिनमें व्हाइट हाउस टैरिफ लगा सकता है. यह  आमतौर पर उन मामलों तक सीमित हैं, जहां आयात राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हों या किसी विशिष्ट उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हों.  

इससे पहले के राष्ट्रपतियों ने आमतौर पर सार्वजनिक सुनवाई के बाद ही टैरिफ लगाए थे. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में टैरिफ लगाते के लिए यह प्रक्रिया अपनाई थी. वहीं दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने टैरिफ लगाने के लिए 1977 के एक कानून की आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है. उदाहरण के लिए, ट्रंप ने कहा है कि कनाडा और मैक्सिको से आने वाला फेंटानिल (एक तरह की ड्रग), एक नेशनल इमरजेंसी है, इस बहाने से उन्होंने दोनों देशों के सामान पर 25 फीसदी शुल्क लगाया है.

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कांग्रेस राष्ट्रपति द्वारा घोषित किसी इमरजेंसी को रद्द करने की कोशिश कर सकती है. वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन ने कनाडा के संबंध में ऐसा करने का प्रस्ताव दिया है. यह विधेयक सीनेट में पारित हो सकता है लेकिन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में शायद न हो पाए. कांग्रेस में आने वाले अन्य विधेयक, जो राष्ट्रपति की टैरिफ निर्धारित करने की शक्ति को सीमित करेंगे, उनके भी पास होने की संभावना कम है. 

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ लगाने की घोषणा के एक-दो महीने में ही इसका असर कीमतों में दिखने लगेगा.

दूसरे देश अमेरिकी उत्पादों पर कितना टैरिफ लगाते हैं?

अन्य देशों की ओर से लगाए जाने वाले टैरिफ की तुलना में अमेरिकी टैरिफ आमतौर पर कम हैं. विश्व व्यापार संगठन के मुताबिक जिन चीजों का वास्तव में व्यापार होता है, उन पर औसतन अमेरिकी टैरिफ केवल 2.2 फीसदी है, जबकि यूरोपीय संघ में उन पर औसतन 2.7 फीसदी, चीन में 3 फीसदी और भारत का 12 फीसदी टैरिफ लगता है. 

दूसरे देश भी अमेरिका की तुलना में अपने किसानों को उच्च टैरिफ से अधिक संरक्षण देते हैं. उदाहरण के लिए  अमेरिकी कृषि वस्तुओं पर 4 फीसदी का टैरिफ लगाता है, जबकि यूरोपीय संघ का 8.4 फीसदी, जापान 12.6 फीसदी, चीन 13.1 फीसदी और भारत का 65 फीसदी टैरिफ है. (विश्व व्यापार संगठन के आंकड़े ट्रंप के हालिया आयात करों या उन देशों के बीच टैरिफ को नहीं गिनते जो देशों ने मुक्त व्यापार समझौतों में तय किए हैं, जैसे अमेरिका-मैक्सिको-कनाडा समझौता. यह कई वस्तुओं को उत्तरी अमेरिकी सीमाओं को बिना किसी शुल्क के पार करने की इजाजत देता है.)  

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