डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से अमेरिका के गन कल्चर और हथियार रखने की आजादी के सबसे मुखर समर्थक रहे हैं. लेकिन खुद एक बार फिर उसी हिंसा का शिकार होने से बाल-बाल बचे. वॉशिंगटन डीसी के हिल्टन होटल के अंदर पत्रकारों संग डिनर के बीच डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप सहित वहां मौजूद लोगों पर एक हमलावर ने हमला करने की कोशिश की. हालांकि, हमलावर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सका, लेकिन इस घटना से सवाल उठता है कि क्या ट्रंप उसी गन कल्चर के पीड़ित हो गए जिसे उन्होंने खुद सालों तक सींचा है?
पिछले तीन सालों में दूसरी बड़ी और उनके पूरे राजनीतिक जीवन की तीसरी ऐसी घटना है जब उन पर सीधे तौर पर बंदूक से हमला हुआ. इससे पहले की एक घटना में तो गोली उनके कान को छूकर निकल गई थी.
गन कल्चर पर ट्रंप का वो पुराना तर्क
इतना ही नहीं, 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने राष्ट्रपति बाइडेन की 'जीरो- टॉलरेंस' नीति को पलटने का वादा किया था. बाइडेन प्रशासन उन डीलरों के लाइसेंस रद्द कर रहा था जो नियमों का उल्लंघन करते हैं, लेकिन ट्रंप ने साफ कहा कि वह इन नियमों को खत्म करेंगे. उन्होंने 'पिस्तौल ब्रेस' जैसे उन उपकरणों पर से भी प्रतिबंध हटाने की बात कही, जिनका इस्तेमाल अमेरिका के कई बड़े कत्लेआमों में हो चुका है.
आंकड़ों की भयावह तस्वीर
सीडीसी (CDC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 में अमेरिका में लगभग 47,000 लोगों की जान गन-हिंसा की वजह से गई. हालांकि यह संख्या पिछले दो सालों के मुकाबले थोड़ी कम है, लेकिन फिर भी यह रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है. इन आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुल मौतों में से 58% यानी करीब 27,300 लोगों ने बंदूक से खुदकुशी की, जबकि 38% (17,927) लोग हत्याओं का शिकार हुए. बाकी मौतें पुलिस कार्रवाई या हादसों की वजह से हुईं.
सिर्फ हत्याएं ही नहीं, खुदकुशी के मामलों में भी बंदूक सबसे बड़ा जरिया बनी हुई है. 2023 में अमेरिका में हुई कुल आत्महत्याओं में से 55% से ज्यादा लोगों ने अपनी जान लेने के लिए बंदूक का सहारा लिया. प्रति 1 लाख आबादी पर मौत की दर को देखें तो 2023 में यह 13.7 थी, जो 1974 के अपने चरम (16.3) से कम तो है, लेकिन विकसित देशों की तुलना में अब भी बेहद डरावनी है.
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