ब्रिटेन-फ्रांस समेत 6 देश होर्मुज में जहाजों के लिए 'सेफ पैसेज' बनाने को तैयार, ईरान को दी चेतावनी

बयान में कहा गया कि ईरान धमकियां दे रहा है, बारूदी सुरंगें बिछा रहा है. ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही में बाधा डाल रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है.

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  • ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड ने होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया.
  • इन देशों ने ईरान द्वारा किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हुए तुरंत ऐसी गतिविधियां बंद करने की मांग की है.
  • बयान में कहा गया कि ईरान ड्रोन, मिसाइल और बारूदी सुरंगें बिछाकर वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बाधित कर रहा है.
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ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मिलकर प्रयास करने और ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए कदम उठाने की बात कही है. इन देशों ने ईरान द्वारा किए जा रहे हमलों की निंदा की और उससे तुरंत ऐसी गतिविधियां बंद करने को कहा.

बयान में कहा गया कि ईरान धमकियां दे रहा है, बारूदी सुरंगें बिछा रहा है. ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही में बाधा डाल रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है. ईरान युद्ध के 20वें दिन भी जलडमरूमध्य बंद जैसा ही है और अब तक 23 वाणिज्यिक जहाज किसी न किसी घटना का शिकार हुए हैं. नेताओं ने कहा कि नेविगेशन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का मूल सिद्धांत है और ईरान की कार्रवाइयों का असर दुनिया भर के लोगों पर पड़ेगा, खासकर कमजोर देशों पर.

बयान में कहा गया कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे हमलों के कारण तेल और गैस की सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया के अन्य देशों और NATO से जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद मांगी है. लेकिन फिलहाल उन्होंने इसे टाल दिया है, हालांकि वे चर्चा जारी रखने के लिए तैयार हैं.

बता दें कि ईरान-अमेरिका-इजरायल की जंग ने तेल और गैस की किल्लत पैदा कर दी है. कई देश इसके कारण सामान्य कामकाज भी नहीं कर पा रहे हैं. भारत इस संकट से बचने की पूरी कोशिश कर रहा है, मगर जो हालात हैं, उसमें दुनिया पर संकट बढ़ता जा रहा है.

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वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) और अधिकतर अन्य सहयोगी देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद करने के उनके आह्वान को खारिज कर दिया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता “ध्वस्त” हो चुकी है और उन्हें अब नाटो देशों या किसी अन्य से सहायता की आवश्यकता नहीं है.

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया था तथा जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले कुछ खाड़ी देशों पर हमले किए और अमेरिका व इजराइल पर दबाव बनाने के लिए रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया.

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