तीस्ता नदी पर चीन की शरण में बांग्लादेश, भारत के लिए क्यों टेंशन

ढाका विश्वविद्यालय में सुरक्षा अध्ययन के विद्वान शफी मोहम्मद मुस्तफा ने कहा कि बीजिंग को इस मामले में शामिल करना ढाका के लिए दिल्ली को उसकी उदासीनता से जगाने का एक तरीका है. लेकिन उन्होंने जोखिमों के बारे में स्पष्ट रूप से बताया.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
तारिक रहमान के पीएम बनने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध सुधरे हैं.
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने चीन से तीस्ता नदी के जीर्णोद्धार परियोजना में आर्थिक मदद की औपचारिक मांग की है
  • तीस्ता नदी परियोजना का लक्ष्य बांग्लादेश में बहने वाले नदी के महत्वपूर्ण हिस्से की खुदाई करना है
  • सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास से गुजरने वाला यह मार्ग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

तीस्ता नदी पर ढाका वर्षों से भारत से मदद मांग रहा है. मगर अब, वह चीन की शरण में है. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने इस महीने की शुरुआत में औपचारिक रूप से चीन से तीस्ता नदी के जीर्णोद्धार परियोजना में मदद करने का अनुरोध किया है.1 अरब अमेरिकी डॉलर की इस योजना का उद्देश्य पूर्वी हिमालय से निकलने वाली और भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में बहने वाली इस जलधारा के 102 किलोमीटर (63 मील) से अधिक हिस्से की खुदाई और जीर्णोद्धार करना है. ये जानकारी खुद बांग्लादेश की सरकारी मीडिया में रिपोर्ट की गई है. 

चीन की सालों की तमन्ना

ढाका का यह अनुरोध विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की तरफ से 6 मई को बीजिंग में अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात के बाद आया. इस मुलाकात के दौरान वांग ने बांग्लादेश को अपनी बेल्ट एंड रोड पहल से जोड़ने में रुचि दिखाई थी. चीन लंबे समय से तीस्ता नदी को पुनर्जीवित करने में रुचि दिखाता रहा है, जो सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास से गुजरती है. 20 किमी चौड़ी और 60 किमी लंबी इस पतली पट्टी को "चिकन नेक" के नाम से भी जाना जाता है.

भारत के लिए ये क्यों गंभीर बात

नेपाल, बांग्लादेश और भूटान से घिरे पश्चिम बंगाल का यह संकरा मार्ग भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ने का एकमात्र जमीनी रास्ता है. अगर इस रास्ते पर खतरा हुआ तो भारत पूर्वोतर से कट सकता है. वाशिंगटन स्थित हडसन इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ भारत और दक्षिण एशिया फेलो अपर्णा पांडेय के अनुसार, भारत पहले ही अपनी सीमा के पास चीन के निर्माण से चिंतित है.

फिर भारत क्यों नहीं ले रहा एक्शन

भारत से कई पड़ोसी देशों ने ऐतिहासिक रूप से भारत से समर्थन मांगा है, लेकिन कभी-कभी परियोजनाओं को मंजूरी देने या शुरू करने में बहुत अधिक समय लग जाता है, इसलिए वे अन्य देशों की ओर रुख करते हैं. हालांकि, वे सभी जानते हैं कि भारत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किसी भी चीनी निवेश और भागीदारी को संदेह की नजर से देखता है. अपर्णा पांडेय ने सुझाव दिया कि एक समाधान दिल्ली और ढाका के बीच सीधी द्विपक्षीय बातचीत हो सकती है, और यदि बातचीत रुक जाती है तो जापान जैसे किसी तटस्थ मध्यस्थ को शामिल किया जा सकता है.

Advertisement

बांग्लादेश क्यों कर रहा ऐसा

तारिक रहमान के सत्ता में आने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध सुधरे हैं. मगर, भारत ने तीस्ता नदी में शुष्क मौसम के दौरान ऊपरी धारा में जल प्रवाह की गारंटी देने वाली किसी संधि पर कभी हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे बांग्लादेश को हर साल अपनी कृषि प्रधान भूमि को थोड़ा और सूखते हुए देखना पड़ रहा है. चीन की पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन से साल के अंत तक परियोजना के लिए अंतिम मास्टर प्लान प्रस्तुत करने की उम्मीद है. इसके विपरीत, भारत अभी भी तकनीकी अध्ययन प्रस्तावित करने के चरण में है. ढाका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध की प्रोफेसर लैलुफर यास्मीन ने कहा कि तीस्ता परियोजना “लाखों आबादी के लिए जीवन-मरण का मुद्दा” है. यास्मीन के अनुसार, सूखे महीनों में पानी का प्रवाह कम होने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं, जिससे बांग्लादेश के उत्तरी क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा और आजीविका खतरे में पड़ जाती है. उन्होंने कहा कि दिल्ली अपनी घोषित "पड़ोसी पहले" विदेश नीति के बावजूद इन परिणामों को गंभीरता से लेने में लगातार विफल रही है.

चीन आया तो भारत क्या करेगा

ढाका विश्वविद्यालय में सुरक्षा अध्ययन के विद्वान शफी मोहम्मद मुस्तफा ने कहा कि बीजिंग को इस मामले में शामिल करना ढाका के लिए दिल्ली को उसकी उदासीनता से जगाने का एक तरीका है. लेकिन उन्होंने जोखिमों के बारे में स्पष्ट रूप से बताया. उन्होंने चेतावनी दी, "यदि बांग्लादेश इस परियोजना को भारत के खिलाफ चीन समर्थित रणनीतिक कदम के रूप में प्रस्तुत करता है, तो दिल्ली कड़ी प्रतिक्रिया देगी." उन्होंने कहा कि ढाका के लिए सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि वह इस पहल को केवल नदी प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन परियोजना के रूप में प्रस्तुत करे, "न कि भू-राजनीतिक कदम के रूप में." मुस्तफा ने आगे कहा, "सबसे अच्छा तरीका पारदर्शिता, तकनीकी सहयोग और परियोजना को इतना खुला रखना होगा कि भारत खुद को पूरी तरह से अलग-थलग महसूस न करे."

Advertisement

ये भी पढ़ें-

वीडियो: बैंकॉक में मालगाड़ी की कई वाहनों से टक्कर, लगी भयंकर आग, 8 लोगों की मौत

पहले कोरोना, अब युद्ध और ऊर्जा संकट.. नहीं सुधरे हालात तो दशकों की उपलब्धि मिट जाएगी- पीएम मोदी

इजरायल ने हमास के आर्म्ड विंग चीफ इज्जेदीन अल-हद्दाद को मार दिया, IDF ने किया कंफर्म

NEET-UG 2026 बायोलॉजी पेपर लीक मामले की मास्टरमाइंड बॉटनी टीचर गिरफ्तार, जानिए कैसे अरेंज किए प्रश्न-पत्र

Featured Video Of The Day
Child Marriage Free India: बाल विवाह रोकने के लिए स्थानीय नेटवर्क कैसे काम करता है? | Child Abuse