बांग्लादेश में जमात के चीफ के साथ बैठे भारत के विदेश सचिव, इस मुलाकात में छिपे बड़े मैसेज को समझिए

India- Bangladesh Ties: भारत केवल बांग्लादेश की सत्ता में मौजूद सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि जमीनी हकीकत को समझकर व्यावहारिक और संतुलित विदेश नीति अपना रहा है.

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  • बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP की सरकार बनने के बाद नए राजनीतिक दौर की शुरुआत हुई है
  • भारतीय विदेश सचिव ने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेता डॉ. शफीकुर रहमान से द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की
  • भारत ने जमात-ए-इस्लामी से संवाद स्थापित कर बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक परिस्थिति को ध्यान में रखा है
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बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP की सरकार बन गई है. इसी के साथ पड़ोसी मुल्क में शेख हसीना के पतन के बाद नया राजनीतिक दौर शुरू हो चुका है. भारत के लिए अब मौका प्रैक्टिकल होने का है. ऐसे में भारत सरकार बांग्लादेश के सत्ता पक्ष ही नहीं जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले विपक्ष को भी शांति का पैगाम देती नजर आ रही है, दोनों मुल्कों के रिश्तों को वापस पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है. इसी क्रम में तारिक रहमान के शपथग्रहण के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के साथ ढाका गए भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करने के लिए मंगलवार की दोपहर को विपक्ष के नेता और बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के चीफ डॉ. शफीकुर रहमान से मुलाकात की.

यह बैठक बांग्लादेश की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के बाद हुई. भारतीय उच्चायोग के फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए एक बयान के अनुसार, मिस्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों की जनता से जुड़ाव वाली प्रकृति पर जोर डाला और बांग्लादेश के लिए भारत के दीर्घकालिक समर्थन को दोहराया. उन्होंने जमात के चीफ को उनकी नई भूमिका संभालने पर शुभकामनाएं भी दीं.

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार शफीकुर रहमान ने दोनों देशों को जोड़ने वाले सभ्यतागत संबंधों पर जोर दिया और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद जताई.

इस मुलाकात में मैसेज छिपा है

ढाका में भारत के विदेश सचिव की जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के प्रमुख से मुलाकात अपने आप में भारत की तरफ से एक बड़ी कूटनीतिक मैसेंजिंग है. दरअसल जमात-ए-इस्लामी को अब तक भारत विरोधी और कट्टर विचारधारा से जोड़ा जाता रहा है. लेकिन ढाका में हुई यह बैठक दिखाती है कि भारत बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रख रहा है और हर स्टेकहोल्डर्स से से संवाद बनाए रखना चाहता है, ताकि भविष्य में अपने सुरक्षा, सीमा, अल्पसंख्यक हितों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर भारत की बात सुनी जाए.

साथ ही इससे यह मैसेज भी जाता है कि भारत केवल सत्ता में मौजूद सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि जमीनी हकीकत को समझकर व्यावहारिक और संतुलित विदेश नीति अपना रहा है.

पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दिया भारत आने का न्योता

पीएम मोदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को उनके परिवार सहित भारत आने का निमंत्रण दिया है और कहा कि वह बहुआयामी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए BNP नेता के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ढाका में नयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के बाद रहमान से मुलाकात के दौरान यह पत्र उन्हें सौंपा.

रहमान को लिखे पत्र में मोदी ने कहा कि दो करीबी पड़ोसी होने के नाते भारत और बांग्लादेश के बीच साझा इतिहास, सांस्कृतिक संबंधों और शांति व समृद्धि के लिए लोगों की आकांक्षाओं पर आधारित गहरी मित्रता है. उन्होंने एक पत्र में कहा, ‘‘हमारी विकासात्मक प्राथमिकताओं के बीच मजबूत सामंजस्य हमारे भविष्य के सहयोग के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करेगा.”

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