- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को शियाओं के आठवें इमाम अली रजा के श्राइन में दफनाया गया है
- जुमे की नमाज के दौरान ईरान में खामेनेई की हत्या का बदला लेने की एक संगठित मुहिम की घोषणा की गई
- ईरानी धर्मगुरुओं ने बताया कि बदला लेना भावनात्मक नहीं बल्कि एक रणनीतिक और धार्मिक कर्तव्य है
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को दफनाने के बाद उनके कब्र की पहली तस्वीर जारी की गई है. इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने बताया कि खामेनेई के बगल में उनकी 14 महीने की पोती जहरा को दफनाया गया है. उसी कब्र के नीचे उनके दामाद, बेटी और बहू को भी दफनाया गया है.
खामेनेई को यहां दफनाने की खास वजह ये है कि ये कब्र शियाओं के आठवें इमाम अली रजा के श्राइन में है. इसके कुछ ही दूर पर इमाम अली रजा की कब्र भी है. इमाम अली रजा हजरत मोहम्मद साहब की वंश से हैं. मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातमा जहरा और हजरत अली के बेटे इमाम हसन और इमाम हुसैन हैं. इमाम हुसैन के बेटे जैनुल आबिदिन हुए. आबिदिन के बेटे हजरत जाफर सादिक हुए और जाफर सादिक के बेटे मूसा काजिम हुए. मूसा काजिम के बेटे हैं इमाम अली रजा. इमाम अली रजा ही मोहम्मद साहब के वंश से इकलौते ऐसे शख्स हैं, जिनकी कब्र ईरान में है.
जुमे की नमाज पर बड़ा फैसला
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को पूरे ईरान में जुमे की नमाज बदला लेने की एक संगठित मुहिम में बदल गई. धर्मगुरुओं ने वॉशिंगटन के साथ और बातचीत करने से इनकार कर दिया. होर्मुज जलडमरूमध्य पर तेहरान के नियंत्रण का बचाव किया और अली खामेनेई की हत्या के लिए साफ तौर पर बदला लेने की मांग की. इस संदेश को 'फ्राइडे प्रेयर पॉलिसी काउंसिल' ने पहले ही तय कर दिया था. काउंसिल ने घोषणा की थी कि जब तक खामेनेई की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक देश भर में साप्ताहिक नमाज "खून का बदला और प्रतिशोध का शुक्रवार" बन जाएगी.
ट्रंप और नेतन्याहू का लिया गया नाम
काउंसिल ने कहा कि बदला लेना कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक "रणनीतिक" और धार्मिक कर्तव्य है. उन्होंने साफ तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम लिया. काउंसिल के बयान में कहा गया, "मुख्य अपराधियों – खासकर अपराधी ट्रंप और बच्चों के हत्यारे नेतन्याहू से बदला लेना अल्लाह के न्याय का एक अटूट हिस्सा है." इसमें आगे कहा गया कि हर उस व्यक्ति या समूह की, जो कार्रवाई कर सकता है, यह जिम्मेदारी है कि वह "जिहाद के लिए आगे आए" और बिना किसी देरी के इस काम को अंजाम दे. काउंसिल ने कहा कि जब तक बदला नहीं लिया जाता, तब तक खामेनेई से बदला लेने की मांग करने वाले बैनर शुक्रवार की नमाज वाली जगहों पर लगे रहेंगे. यही बात कई बड़े शहरों में भी दोहराई गई.
खून का बदला सामने होना चाहिए
मशहद में, जहां खामेनेई को दफनाया गया था, शुक्रवार की नमाज के इमाम अहमद आलमोलहोदा ने कहा कि बदला सिर्फ एक अधूरा वादा बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनता को वह बदला होते हुए दिखना चाहिए. उन्होंने कहा, "शहीद नेता का बदला और खून का बदला लोगों की नजरों के सामने होना चाहिए, और लोगों को इसे अपनी आंखों से देखना चाहिए. तभी असली बदला माना जाएगा." सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि सईद जलीली ने मशहद में नमाज पढ़ने वालों से कहा कि बदला लेना देश का अधिकार है और अधिकारियों की जिम्मेदारी है. जलीली ने कहा, "अगर आप कहते हैं कि ईरान की संपत्ति जारी की जानी चाहिए, तो हमारे देश की सबसे बड़ी संपत्ति हमारे प्यारे नेता थे. आज, देश का अधिकार है कि वह बदला लेकर इस महान संपत्ति की रक्षा करे, और अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे इसे पूरा करें."
गांव से लेकर शहर तक गुस्सा
बुशहर में शुक्रवार की नमाज के अंतरिम इमाम यूसुफ जमाली ने कहा कि जब तक अमेरिका और इजरायल को सजा नहीं मिल जाती, तब तक नमाज पढ़ने वाले बदले के लिए नारे लगाते रहेंगे. जमाली ने कहा, "हम अधिकारियों और सशस्त्र बलों के साथ खड़े रहेंगे और, अल्लाह ने चाहा तो, व्हाइट हाउस को उसके अंदर मौजूद लोगों के सिर पर गिरा देंगे. जान लें कि हमारे बदले की तलवार जालिमों पर गिरेगी." रश्त में, मौलाना रसूल फलाहाती ने बदले की बात को अमेरिका-ईरान समझौते और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के विवाद से जोड़ा. “युद्ध के बीच बातचीत करना निरर्थक है. हालिया समझौते के तहत, हमने होर्मुज जलडमरूमध्य खोला, लेकिन अमेरिका ने अपनी किसी भी प्रतिबद्धता का पालन नहीं किया और इसके बजाय अपने ठिकानों को और मजबूत करने में जुट गया.” उन्होंने कहा कि दुनिया भर के मुसलमान और “स्वतंत्र राष्ट्र” ट्रंप और नेतन्याहू से बदला लेने के लिए तैयार हैं और उन्होंने ईरान के सशस्त्र बलों से अमेरिका की किसी भी और कार्रवाई का कड़ा जवाब देने का आग्रह किया.
ईरान के कोम में, अलीरेजा अराफी ने खामेनेई की हत्या करने वालों और हत्या का आदेश देने वालों के खिलाफ बदला लेने को एक कानूनी और धार्मिक अधिकार बताया, जिसे भुलाया नहीं जा सकता. शिराज के अंतरिम शुक्रवार की नमाज के अध्यापक आदेल हाजीपुर ने लगभग इसी तरह की भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों का खात्मा जनता की मांग है. मलायर में, मोहम्मद-अली अर्जांदेह ने कहा कि शुक्रवार की नमाज तब तक "प्रतिशोध और रक्त प्रतिशोध के शुक्रवार" बनी रहेगी जब तक कि इजरायल नष्ट नहीं हो जाता और क्षेत्रीय असुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोगों को खत्म नहीं कर दिया जाता.
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