बच्चों को अगवा कर जबरन सैनिक बना भेज रहे जंग के मैदान में, बाल सैनिकों ने सुनाई खौफनाक कहानी

कोलंबिया के ऐसे ही लड़ाकों के हाथ से बच निकले बच्चों ने अपनी आपबीती सुनाई. लड़के ने जंग के मैदान की स्थिति को याद करते हुए बताया, 'जब सूडान के लड़ाकू विमानों ने हमला किया, तो मेरे हाथ-पैर एक पिकअप पर लगी एंटी-एयरक्राफ्ट गन से बांध दिए गए.'

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युद्ध में बच्चों के इस्तेमाल को अपराध माना जाता है, मगर फिर भी ये हो रहा है. (फोटो-संकेतात्मक)
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  • सूडान के गृहयुद्ध में कोलंबियाई भाड़े के सैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज की मदद के लिए तैनात हैं
  • बच्चों को हथियारों से बांधकर जबरन युद्ध में भेजा जाता है और उन्हें पीटा जाता है
  • संयुक्त अरब अमीरात ने सूडान में हथियार और सैन्य मदद देने के आरोपों का खंडन किया है

कई देशों में सालों से युद्ध चल रहा है. हजारों लाखों सैनिक मारे जा रहे हैं, फिर भी युद्ध खत्म नहीं हो रहा. आतंकवादी संगठनों में हजारों-हजारों नये रंगरुट तैयार किए जा रहे हैं. आखिर कैसे? क्या सब अपनी इच्छा से लड़ रहे हैं? मरने को तैयार हैं या मर रहे हैं? सूडान से आई एक रिपोर्ट इन सभी सवालों के जवाब देती है. ये दिल को दुखाने वाली है और साथ ही सोचने पर मजबूर करने वाली भी.  

पहले समझिए मामला

सूडान का गृहयुद्ध 3 साल से अधिक समय का हो गया है. यह विनाशकारी संघर्ष 15 अप्रैल 2023 को सूडानी सेना (SAF) और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच सत्ता पर नियंत्रण को लेकर शुरू हुआ. अप्रैल 2023 से अब तक लगभग 3 साल और 3 महीने से दोनों के बीच युद्ध चल रहा है. UN के अनुसार, सोमालिया, यूक्रेन और सूडान समेत विदेशों में होने वाली लड़ाइयों के लिए लगभग 10,000 कोलंबियाई लोगों ने खुद को किराए पर लड़ने के लिए पेश किया है. कोलंबिया में दशकों से चले आ रहे आंतरिक संघर्ष में गुरिल्ला, अर्धसैनिक बल और ड्रग तस्कर शामिल रहे हैं. इस संघर्ष ने ऐसे अनुभवी सैनिकों की एक बड़ी फौज तैयार की है, जिनकी अमेरिकी-समर्थित सैन्य ट्रेनिंग की वजह से बहुत मांग है, लेकिन कम पेंशन और आम नागरिकों के लिए नौकरी के कम मौकों की वजह से वे विदेशों में काम करने को मजबूर हैं. हाल ही में बने एक कानून के तहत कोलंबियाई लोगों का विदेशी संघर्षों में लड़ना मना है, लेकिन पूर्व सैनिकों के समूहों का कहना है कि भर्ती अभी भी जारी है. यही ज्यादा सैनिकों की मांग पर बच्चों को भी अगवा कर लेते हैं.

कई गवाह भी हैं

'ह्यूमन राइट्स वॉच' और एक प्राइवेट रिसर्च फर्म 'कॉन्फ्लिक्ट इनसाइट्स ग्रुप' ने सूडान के पश्चिमी इलाके दारफुर में RSF के साथ कोलंबियाई भाड़े के सैनिकों (मर्सिनरीज़) की मौजूदगी का पता लगाया है. इसमें अक्टूबर में एल फाशर पर कब्जा करने की घटना भी शामिल है, जहां RSF लड़ाकों पर बड़े पैमाने पर हत्याओं का आरोप है. इस साल अलग-अलग रिपोर्टों में, 'ह्यूमन राइट्स वॉच' और 'कॉन्फ्लिक्ट इनसाइट्स ग्रुप' ने कहा कि कोलंबियाई लोगों को एक संयुक्त अरब अमीरात के कॉन्ट्रैक्टर ने काम पर रखा था और उन्हें अमीराती मिलिट्री बेस में ट्रेनिंग दी गई थी. UAE ने उस समय इन आरोपों से इन्कार किया था. 2025 में छह महीने तक दारफुर में लड़ने वाले एक कोलंबियाई भाड़े के सैनिक ने AP को बताया कि उस समय सैकड़ों कोलंबियाई लोग RSF के साथ फ्रंट लाइन पर थे और नए लोगों को ट्रेनिंग देने में शामिल थे. उसने कहा कि उसने 13 साल तक के बच्चों को RSF के साथ लड़ते देखा. उसने कानूनी नतीजों के डर से अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह बात कही. कोलंबियाई सरकार ने कहा कि उसके पास ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है जिससे इन आरोपों की पुष्टि हो सके कि कोलंबियाई लोगों ने सूडान में बाल सैनिकों को भर्ती किया या उन्हें ट्रेनिंग दी. उसने इस तरह के दुर्व्यवहार की निंदा की.

बच्चों की आपबीती

कोलंबिया के ऐसे ही लड़ाकों के हाथ से बच निकले बच्चों ने अपनी आपबीती सुनाई. अब 17 साल के हो चुके उस लड़के ने जंग के मैदान की स्थिति को याद करते हुए बताया, 'जब सूडान के लड़ाकू विमानों ने हमला किया, तो मेरे हाथ-पैर एक पिकअप पर लगी एंटी-एयरक्राफ्ट गन से बांध दिए गए थे. मैंने एक और बच्चे को स्टीयरिंग व्हील से जंजीर से बंधा हुआ देखा. जब हमें जबरन पकड़कर युद्ध के मैदान में लाने वाले लोग छिपने की जगह ढूंढ रहे थे, उस समय भी हमें वहीं रुकने और राजधानी खार्तूम के ऊपर उड़ रहे जेट विमानों को मार गिराने का आदेश दिया गया. अगर हम भागने की कोशिश करते, तो हमें पकड़ने वाले ही मार देते या फिर विमान खत्म कर देते.'

UAE ने किया इन्कार

इस लड़के ने बताया कि जिन लोगों ने उसे गन से बांधने का आदेश दिया था, वे कोलंबियाई भाड़े के सैनिक (मर्सिनरी) थे. ये सैनिक सूडान की सेना के खिलाफ 'रैपिड सपोर्ट फोर्सेज' (RSF) को सैन्य मदद दे रहे थे; यह युद्ध अब अपने चौथे साल में है. एक और बच्चे ने बताया कि उसे तोप से हमले करने के लिए मजबूर किया गया और बात न मानने पर पीटा गया. मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इन्हें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की एक सरकारी कंपनी ने RSF के साथ लड़ने के लिए भर्ती किया था. मानवाधिकार समूह और सूडान की सेना UAE पर RSF को हथियार देने का आरोप लगाते हैं. साथ ही, UN के एक पैनल ने कहा है कि उसने खाड़ी देशों के उस संघ (जिसमें दुबई भी शामिल है) से RSF तक हथियारों की खेप पहुंचने का पता लगाया है.

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इस खबर के छपने के बाद AP को दिए एक बयान में, UAE ने सूडान में किसी भी युद्धरत पक्ष को हथियार या सैन्य मदद देने से इन्कार किया. उसने भाड़े के सैनिकों या विदेशी लड़ाकों को सूडान भेजने में मदद करने या भाड़े के सैनिकों से कोई संबंध होने से भी इन्कार किया. UAE ने कहा कि जिस कंपनी की जांच की गई, उसका सूडान में भाड़े के सैनिकों वाली गतिविधियों से कोई संबंध नहीं मिला. UAE ने सभी पक्षों द्वारा किए गए अत्याचारों की निंदा की और कहा कि वह संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों का समर्थन करता है.

बताते हुए रो पड़ा बच्चा

जिस लड़के को बंदूक से जंजीर से बांधकर रखा गया था, वह रो पड़ा जब उसने उन निशानों पर हाथ फेरा जो उसे लगभग 18 महीनों तक जबरन लड़ाई लड़ने के दौरान मिले थे. उसने कहा, "मैं बहुत डरा हुआ था. मैं बस भागकर घर जाना चाहता था." बच्चों को दिन-रात जंजीरों से बांधकर रखा जाता था. उसने बताया कि सूडान की राजधानी खार्तूम के जुड़वां शहर ओम्दुरमान के एक बाजार में, जहां वह सिगरेट बेच रहा था, RSF के लड़ाकों ने उसे पकड़ लिया. उसने कहा कि अर्धसैनिक बल के जवान सेना छोड़कर भागे हुए लोगों को ढूंढ रहे थे और गलती से उसे पकड़ लिया. उस समय वह 15 साल का था. उसने कभी बंदूक नहीं पकड़ी थी, फिर भी उसे खार्तूम में लड़ाई के मोर्चे पर भेज दिया गया. उसके सिर और आंख के नीचे के निशान बताते हैं कि उसे बम के टुकड़ों (श्रापनेल) से चोट लगी थी.

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बांधकर रखते थे

बाद में उसे ओम्दुरमान में RSF के एक बेस, जिसे सेंट्रल रिजर्व कैंप के नाम से जाना जाता है, ले जाया गया, जहां उसे दर्जनों अन्य बच्चों के साथ रखा गया. उनके हाथ हर समय बंधे रहते थे, यहां तक कि खाना खाते समय भी. उसने कहा, "हमें नहाने की इजाजत नहीं थी. इसके बजाय, जब हम बंधे होते थे, तभी वे हम पर पानी डाल देते थे." उसने बताया कि बेस पर दर्जनों विदेशी भाड़े के सैनिक थे, जिन्हें वहां मौजूद RSF के लड़ाके कोलंबियाई बताते थे. अनुवादकों के जरिए बात करते हुए, उन्होंने बच्चों को एंटी-एयरक्राफ्ट गन चलाना सिखाया. उसने कहा कि उन्होंने RSF के लड़ाकों से बच्चों को हथियारों से बांधने के लिए कहा ताकि वे भाग न सकें. 

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