पेपर लीक का मुद्दा अब सड़क से सीधे संसद और 2027 के चुनावी मैदान तक पहुंच गया है. राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल तीनों ने इस आंदोलन को सरकार के खिलाफ राजनीतिक युद्ध बना दिया है. राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के साथ 3 बड़ी मांगें रखीं- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, लाठीचार्ज के दोषियों पर कार्रवाई और PM मोदी की माफी. उन्होंने आंकड़ा दिया कि पिछले 10 साल में 152 बार पेपर लीक हुए, 7.5 करोड़ परिवार प्रभावित हुए, लेकिन एक भी शख्स दोषी करार नहीं हुआ. 21 जुलाई को PM आवास के बाहर हुए प्रदर्शन में राहुल और अखिलेश दोनों को हिरासत में लिया गया था. अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि ये कांग्रेस-BJP का मुद्दा नहीं, ये युवाओं और छात्रों का मुद्दा है. दोनों नेता इस मुद्दे पर सुपर एक्टिव मोड में हैं. सरकार ने सदन में चर्चा के लिए हामी भरी है, लेकिन नियमों को लेकर पेंच फंसा है. बीजेपी इसे सियासी साजिश बता रही है.