एनडीटीवी डिजिटल के साथ बातचीत में जुनैद बताते हैं कि मैं पहली बार जंतर-मंतर पर आया तो अकेला था लेकिन लोग धीरे-धीरे लोग जुड़ने लगे और देखते ही देखती हम 25 लोगों की टीम बन गए. लेकिन इस पूरी कहानी का एक और है, जिसको याद करके जुनैद डर जाते हैं. वो कहते हैं कि मुझे लगा था कि जेएनयू के नजीब अहमद जैसा हाल मेरा भी कर दिया जाएगा. जुनैद के साथ ऐसी कौन की घटना घटी कि उन्हें यह सोचने पर मजूबर होना पड़ा और वे जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के आखिरी दिन जब लोग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खुशियां मना रहे थे तो जुनैद क्यों नहीं नजर आए, इन सभी पहलुओं पर उनसे तफ्सील से बात की है.