Exclusive: SBI की भूमिका पर भी सवाल? राम मंदिर दान चोरी केस में क्या बोले नृपेंद्र मिश्र

क्या अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और दान के ऑडिट सिस्टम में कोई बड़ी खामी सामने आई है? मंदिर के सुरक्षा और ऑडिट मैकेनिज्म, दान पात्रों से गायब हो रही रकम के आरोपों और सीसीटीवी फुटेज के डिलीट होने के दावों को लेकर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस खास इंटरव्यू में कई बड़ी बातें बताई हैं.  विपक्ष और अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए सवालों पर नृपेंद्र मिश्र ने साफ किया कि डोनेशन रूम के सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों के बाद ऑटोमैटिक डिलीट (इरेज़) हो जाते हैं. हालांकि, उन्होंने माना कि शुरुआती जांच में कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी गई हैं, जहां पैसों के बंडलों को निर्धारित जगह के बजाय किसी व्यक्ति विशेष के पास रखा जा रहा था. काउंटर पर मिलने वाले दान और जेवरातों की रसीद तो मौजूद है, लेकिन सीधे दान पात्रों में चढ़ाई जाने वाली नकदी और आभूषणों का सही हिसाब रखना SIT के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. दान राशि की गिनती की जिम्मेदारी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को दी गई थी, लेकिन बैंक द्वारा इसे आउटसोर्स और एड-हॉक (अस्थायी) कर्मचारियों से कराने पर भी नृपेंद्र मिश्र ने चिंता जताई और बैंक की जवाबदेही तय करने की बात कही.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले को लेकर गंभीर हैं. नृपेंद्र मिश्र के अनुसार, प्रधानमंत्री इसे एक 'ब्रोकन सिस्टम' (चरमराई व्यवस्था) मान रहे हैं और इसे पूरी तरह से लूपहोल-फ्री और पारदर्शी बनाने के पक्ष में हैं.

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