अशोक खरात से जुड़े मामले ने एक बार फिर धर्म और अध्यात्म के नाम पर चल रहे कथित गुरुओं और ढोंगी बाबाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसी मुद्दे पर बातचीत में बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री और महामंडलेश्वर योगिनी ममता कुलकर्णी ने बेहद तीखी और साफ राय रखी है. ममता कुलकर्णी का कहना है कि आज के दौर में धर्म और अध्यात्म ज्ञान का नहीं, बल्कि “धंधे” का माध्यम बन गया है. बिना कठिन साधना और आत्मज्ञान के लोग खुद को अवतार और सिद्ध पुरुष घोषित कर रहे हैं, जिसका सीधा नतीजा आम लोगों खासतौर पर महिलाओं का शोषण है.
“दो किताब पढ़कर कोई साधु या ज्योतिषी नहीं बन जाता” योगिनी ममता ने कहा कि अध्यात्म कोई शॉर्टकट वाला रास्ता नहीं है. “चार‑पांच साल की निरंतर साधना के बाद ही ध्यान का अर्थ समझ में आता है. असली आत्मज्ञान वही दे सकता है जिसने स्वयं सिद्ध अवस्था प्राप्त की हो.” उनका कहना है कि आज हर दूसरा व्यक्ति दो‑तीन किताबें पढ़कर खुद को ज्योतिषी या साधु बताने लगता है, जबकि असली साधना में वर्षों की तपस्या, अनुशासन और संयम जरूरी होता है.
कुंडलिनी जागरण को लेकर फैले भ्रम पर चेतावनी
ममता कुलकर्णी के अनुसार, सिर्फ कुंडलिनी जागरण हो जाना ही सिद्धि नहीं है. “जब तक कुंडलिनी शक्ति मूलाधार से सहस्त्रार तक स्थिर न हो, तब तक व्यक्ति सिद्ध नहीं कहलाता। और जब तक कामवासना शेष है, तब तक यह पशु अवस्था ही है.” उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन तथाकथित गुरुओं के जीवन में लोभ, वासना और सत्ता की लालसा है, वे आत्मज्ञान से कोसों दूर हैं.
अशोक खरात जैसे मामलों को बताया ‘अज्ञान और लालच का परिणाम’
अशोक खरात पर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता कुलकर्णी ने कहा कि यह मामला कोई अपवाद नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही बीमारी का लक्षण है. “देवी‑देवताओं के नाम पर लोगों को डराकर, भविष्य दिखाने का झूठा दावा कर, समस्याओं के समाधान का लालच देकर शोषण किया गया.” उनका मानना है कि धर्म के नाम पर ऐसे लोग समाज को भ्रमित कर रहे हैं, क्योंकि जनता स्वयं विवेक का प्रयोग नहीं कर रही.
महिलाओं से सीधी अपील: विवेक जरूरी है
महिलाओं के शोषण के सवाल पर ममता कुलकर्णी ने दो‑टूक कहा, “कोई आपको ज्योतिष या साधना के नाम पर बेडरूम में क्यों बुलाता है? अगर वाणी में अशुद्धता है, तो वहीं चेत जाना चाहिए.” उन्होंने अपील की कि किसी भी गुरु, साधु या गॉडमैन की असली पहचान उसकी वाणी, आचरण और संयम से की जाए—ना कि चमत्कारों से.
महामंडलेश्वर पद को लेकर भी तीखा हमला
ममता कुलकर्णी ने स्वीकार किया कि महामंडलेश्वर बनने के बाद उन्होंने करीब से देखा कि इस पद का भी बाजार बन चुका है. “आज रोज़ सैकड़ों महामंडलेश्वर बन रहे हैं. इनमें से ज़्यादातर के पास न ज्ञान है, न साधना—सिर्फ वेशभूषा है.” उन्होंने बताया कि इसी कारण उन्होंने कई प्रस्ताव ठुकरा दिए और अखंड साधना को ही अपना मार्ग बनाए रखा.
“भविष्य कोई नहीं बता सकता”
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने 25 साल कठोर तपस्या की, फिर भी मुझे नहीं पता अगला क्षण क्या लाएगा। फिर कोई और कैसे आपका भविष्य तय कर सकता है?” उनके अनुसार सच्चा अध्यात्म व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है, किसी बाबाओं पर आश्रित नहीं.