नई दिल्ली. मध्य‑पूर्व में बढ़ते तनाव, ईरान‑इजरायल टकराव और अमेरिका की भूमिका को लेकर योग गुरु और पतंजलि समूह के संस्थापक स्वामी रामदेव ने तीखे और व्यापक विचार रखे हैं. NDTV के कार्यक्रम चक्रव्यूह में उन्होंने इस संघर्ष को सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक और वैचारिक युद्ध करार दिया.
स्वामी रामदेव का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक देश या चेहरे की नहीं बल्कि आधिपत्यवाद, साम्राज्यवाद और राजनीतिक वर्चस्व की मानसिकता की है.
“यह सिर्फ बंदूकों का नहीं, विचारों का युद्ध है”
स्वामी रामदेव ने कहा, “ये एक युद्ध है और इस युद्ध में वही जीतेगा जो जवाबों की कसौटी पर खरा उतरेगा। जो लड़ नहीं पाएगा, वह समाप्त हो जाएगा.” उनके अनुसार दुनिया इस वक्त एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां तेल, गैस, सत्ता और प्रभाव को लेकर संघर्ष खुलकर सामने आ गया है. उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को इस संघर्ष के “चेहरे” बताते हुए कहा कि असली समस्या राजनीतिक उन्माद और वर्चस्व की चाह है.
“युद्ध अपराधी अमेरिका और इजरायल”
रामदेव ने स्पष्ट कहा कि वह इस पूरे संघर्ष में अमेरिका और इजरायल को युद्ध अपराधी मानते हैं. “अगर दोष की दृष्टि से देखें तो ईरान प्रतिकार कर रहा है. युद्ध अपराधी अमेरिका और इजरायल हैं. इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर इसकी शुरुआत की.”
हालांकि इस सवाल पर कि ईरान ने सबसे पहले मिसाइलें दागीं, उन्होंने कहा कि इससे पहले भी क्षेत्र में “छिटपुट संघर्ष” चलते रहे हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति थर्ड वर्ल्ड वॉर जैसी बन चुकी है.
“ईरान को मिटाया नहीं जा सकता”
ईरान पर हमलों को लेकर स्वामी रामदेव ने कहा कि किसी व्यक्ति को मारा जा सकता है लेकिन विचार, दर्शन और स्वाभिमान को नहीं. “ईरान की 9–10 करोड़ की आबादी में एक करोड़ से ज्यादा लोग खामनेई की विचारधारा को जीते हैं. इन्हें न झुकाया जा सकता है, न मिटाया जा सकता है.”
उन्होंने ईरान की 40–45 साल की रणनीतिक तैयारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके पास केवल परमाणु हथियार ही नहीं, उससे कहीं ज़्यादा ताकत है.
भारत की भूमिका पर क्या बोले रामदेव?
भारत की विदेश नीति पर बोलते हुए रामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तटस्थ और संतुलित कूटनीति की सराहना की. “इतने संवेदनशील मुद्दे पर जितनी गंभीरता और संयम चाहिए, उतनी मोदी जी बरत रहे हैं.” उन्होंने विपक्ष को सुझाव दिया कि वह महंगाई, बेरोज़गारी और घरेलू मुद्दों पर सरकार से सवाल करें, न कि भारत की कूटनीतिक स्थिति को कमजोर करें.
“भारत के लिए दुनिया एक परिवार है”
रामदेव ने कहा कि जबकि अमेरिका और चीन दुनिया को बाज़ार की तरह देखते हैं, भारत की सोच ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की है. उनके मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री स्वयं कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री मोदी चाहें तो 24 घंटे में युद्ध रुक सकता है, जो भारत की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है.
क्यों कम बोलते हैं स्वामी रामदेव?
यह सवाल भी उठा कि बीते कुछ वर्षों में रामदेव राजनीतिक मुद्दों पर अपेक्षाकृत कम क्यों बोले. इस पर उन्होंने कहा, “मैं शांत नहीं हुआ, बस चयनित बोलता हूँ। एक संन्यासी को वही बोलना चाहिए जो ज़रूरी हो.”
“सनातन धर्म को प्रतीकों से नहीं जिया जाता”
खुद को मानवतावादी और राष्ट्रवादी बताते हुए रामदेव ने कहा कि वे सनातन धर्म को सिर्फ बोलते नहीं बल्कि जीते हैं. उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाया कि वह ऐसे लोगों को धार्मिक प्रवक्ता बनाकर पेश करती है जिन्हें धर्म, दर्शन और शास्त्रों का ज्ञान नहीं होता, जिससे सनातन धर्म की छवि को नुकसान होता है.
“इस युद्ध का असर 50 साल तक रहेगा”
अपने बयान के अंत में स्वामी रामदेव ने चेतावनी दी कि मौजूदा वैश्विक संघर्ष का असर आने वाले 50 वर्षों तक रहेगा. “न इसमें अमेरिका‑इजरायल जीत सकते हैं और न ही ईरान हार सकता है.”