उत्तर प्रदेश के जालौन के एक लेखपाल महेश चंद से जुड़ा ₹300 की रिश्वत का मामला भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी की बड़ी तस्वीर पेश करता है. वर्ष 1977 में महेश चंद को कानपुर में ₹300 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था. इसके बाद 1985 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. हालांकि, आरोपी ने इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां यह अपील करीब 41 वर्षों तक लंबित रही.