अमेरिका का बड़ा ऐलान, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का फैसला, वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा
वॉशिंगटन/तेहरान. अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक यह नाकेबंदी आज शाम 7:30 बजे से लागू होगी. अमेरिका का कहना है कि इस कदम का मकसद ईरान की तेल बिक्री रोकना और उन जहाजों पर कार्रवाई करना है जो ईरान को टोल टैक्स देकर होर्मुज से गुजर रहे हैं.
नाकेबंदी में अमेरिका के दो मुख्य लक्ष्य
अमेरिका की घोषित रणनीति के तहत समुद्र में दो बड़े कदम उठाए जाएंगे.
पहला. उन सभी जहाजों को रोकना जो ईरान को टोल टैक्स देकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर रहे हैं.
दूसरा. ईरान के प्रमुख बंदरगाहों की घेराबंदी कर वहां से तेल और गैस की आवाजाही पूरी तरह ठप करना.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले और वहां से निकलने वाले सभी जहाजों को रोका जाएगा. इस नाकेबंदी के दायरे में फारस की खाड़ी और ओमान सागर दोनों शामिल हैं.
बंदर अब्बास समेत ईरान के सभी बड़े बंदरगाह निशाने पर
ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह बंदर अब्बास इस नाकेबंदी का प्रमुख टारगेट है. यह बंदरगाह खाड़ी के मुहाने पर स्थित है और सालाना करीब 3.7 करोड़ टन माल और 10 लाख से ज्यादा कंटेनर हैंडल करता है. यहां से तेल, स्टील, खाद, अनाज और भारी उपकरणों का निर्यात होता है.
इसके अलावा जिन ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी की तैयारी है उनमें शामिल हैं.
बंदर अब्बास, जास्क, शाहिद रजाई, बंदर‑ए‑लंगे, बुशहर पोर्ट और खारग आइलैंड.
खाड़ी देशों के लिए भी संकट
अगर नाकेबंदी पूरी तरह लागू होती है तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा. यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और इराक से निकलने वाले कई तेल और गैस जहाज भी प्रभावित होंगे.
यूएई के खलीफा पोर्ट, जेबेल अली, मीना राशिद, पोर्ट खालिद, सऊदी अरब के रास तनुरा, दम्माम और किंग फहद पोर्ट, कतर के रास लफान, कुवैत के मीना अल अहमदी और इराक के उम्म कसर जैसे बंदरगाह भी दबाव में आ सकते हैं. फुजैरा ऐसा एकमात्र पोर्ट है जहां से होर्मुज को बायपास कर आंशिक सप्लाई संभव है.
समुद्री ट्रैफिक लगभग ठप
समुद्री खुफिया एजेंसी लॉयड्स लिस्ट के मुताबिक नाकेबंदी के ऐलान के बाद होर्मुज क्षेत्र में शिपिंग ट्रैफिक लगभग रुक गया है. कई जहाजों ने रास्ता बदल लिया है और कुछ जहाज वापस लौट गए हैं. इससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पर तत्काल असर दिखाई देने लगा है.
तेल कीमत $100 के पार, बाजारों में हड़कंप
नाकेबंदी के ऐलान के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में 8 प्रतिशत तक उछाल आया और दाम $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गए. शाम तक कीमत $104 प्रति बैरल तक चली गई. मार्केट एक्सपर्ट्स का दावा है कि हालात और बिगड़े तो कच्चा तेल $150 प्रति बैरल तक जा सकता है.
शेयर बाजारों पर सीधा असर
भू‑राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा.
भारत में सेंसेक्स 703 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 208 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.
पाकिस्तान में कराची स्टॉक एक्सचेंज 7,000 अंकों से ज्यादा टूट गया.
अमेरिका में डाव जोन्स, नैस्डैक और एशियाई बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज हुई.
सोना‑चांदी सस्ते
तनाव के बीच निवेशकों की सतर्कता का असर कीमती धातुओं पर भी पड़ा. चांदी करीब ₹3,000 और सोना ₹316 प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ.
45 दिनों में सोना करीब ₹9,000 और चांदी ₹30,000 तक गिर चुकी है.
ईरान का पलटवार, नाकेबंदी को बताया नाकाम
ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. ईरान का कहना है कि अगर उसके बंदरगाहों को खतरा हुआ तो खाड़ी क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा. ईरानी नेतृत्व ने दावा किया है कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण बना रहेगा और दुश्मन जहाजों को गुजरने नहीं दिया जाएगा.
ईरान की चेतावनी है कि होर्मुज या बाब‑अल‑मंदेब जैसे अहम समुद्री रूट बंद हुए तो दुनिया भर में तेल और गैस की भारी कमी हो जाएगी और कीमतें बेकाबू हो सकती हैं.
दुनिया बंटी हुई, समर्थन नहीं मिला
अमेरिका की नाकेबंदी योजना को लेकर वैश्विक मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं.
ब्रिटेन ने साफ कहा है कि वह किसी भी नौसैनिक नाकेबंदी में शामिल नहीं होगा.
रूस ने चेतावनी दी है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार अस्थिर होंगे.
चीन ने ईरान के साथ ऊर्जा समझौतों का हवाला देते हुए हस्तक्षेप का विरोध किया है.
तुर्की ने बातचीत और युद्धविराम का सुझाव दिया है.
वहीं, इजरायल ने अमेरिकी कदम का समर्थन किया है.
हालात बेहद संवेदनशील
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट में बदल चुका है. ऊर्जा बाजार, शेयर बाजार और कूटनीति तीनों मोर्चों पर दबाव बढ़ चुका है. आने वाले घंटे यह तय करेंगे कि यह तनाव युद्ध की ओर जाएगा या कूटनीति के रास्ते थमेगा.