पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी लगातार एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. शपथ लेने के बाद से ही सरकार ने तेजी से फैसले और जमीनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे सियासी माहौल गर्म हो गया है.
हावड़ा समेत कई इलाकों में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़े स्तर पर बुलडोजर कार्रवाई की गई. रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाजारों के आसपास बने अवैध ढांचों को हटाया गया, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और आम लोगों को राहत देने की कोशिश की गई. प्रशासन का कहना है कि इन अतिक्रमणों के कारण आम जनता को आने-जाने में भारी दिक्कतें हो रही थीं.
सीएम बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कई अहम फैसले भी लिए हैं. बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग को तेज करने का ऐलान, धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर को लेकर नियमों का पालन, चुनावी हिंसा से जुड़े मामलों की जांच और पुराने केस फिर से खोलने जैसे फैसले चर्चा में हैं. इसके अलावा पशु तस्करी रोकने के लिए टास्क फोर्स और गैरकानूनी बूचड़खानों पर कार्रवाई का आदेश भी दिया गया है.
स्वास्थ्य और कल्याण योजनाओं के तहत भी सरकार सक्रिय दिखी है. केंद्र की योजनाओं को लागू करने और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की कवायद जारी है.
हालांकि इन कार्रवाइयों पर सियासत भी तेज हो गई है. टीएमसी और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार चयनात्मक कार्रवाई कर रही है और कुछ फैसलों को राजनीतिक नजरिए से लिया जा रहा है. वहीं सरकार का दावा है कि यह कदम कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं.
इसी बीच, उत्तर प्रदेश से भी सख्त कार्रवाई की तस्वीरें सामने आई हैं. लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबरों पर बुलडोजर चलाया गया, जिसके खिलाफ अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. इसके साथ ही यूपी पुलिस ने रील बनाने पर भी सख्ती दिखाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है.
देश के अलग-अलग राज्यों में इस तरह की सख्त प्रशासनिक कार्रवाई अब एक बड़े ट्रेंड के रूप में देखी जा रही है, जहां सरकारें कानून व्यवस्था और सार्वजनिक अनुशासन को प्राथमिकता देती नजर आ रही हैं.