चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कुछ ही घंटों में दिल्ली पहुंचने वाले हैं, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और अहम बैठक चर्चा में रही. एससीओ शिखर सम्मेलन के बाद एक बार फिर पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. यह मुलाकात इस बात का संकेत है कि मौजूदा वैश्विक संकट के दौर में भारत कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का स्पष्ट रुख दोहराते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के विवादों का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है. भारत ने विशेष रूप से समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही (Freedom of Navigation) और नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया, क्योंकि इस समय होरमुज जलडमरूमध्य से लेकर बाब-अल-मंदेब तक के अहम तेल मार्गों को लेकर चिंता बनी हुई है. 11 दिनों में दूसरी बार पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन की मुलाकात हुई. दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन से इतर हुई इस बैठक को केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. संदेश साफ है कि दोनों देश उन मूल्यों में विश्वास रखते हैं जो मानवता को सर्वोपरि मानते हैं और युद्ध को विनाश का रास्ता मानते हैं. ईरान के लिए यह कठिन समय है और तेहरान चाहता है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को कम करने और शांति बहाल करने में भारत सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाए.