मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है. पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को मेरठ पुलिस ने सिवाय होटल प्लाजा के पास बैरिकेटिंग करके रोक दिया. इस दौरान पुलिसकर्मी और चंद्रशेखर आजाद के बीच तीखी बहस हुई. सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में मिलने से रोका नहीं जा सकता, वहीं पुलिसकर्मी अधिकारी के आदेश का हवाला देते रहे. बहस के दौरान एक पुलिसकर्मी ने प्रदर्शनकारी को थप्पड़ भी मार दिया, जिसके बाद मामला और भड़क गया. इस पूरे प्रकरण में 13 नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
मामला तब शुरू हुआ, जब ललिता गौतम की हत्या के बाद प्रदर्शन के दौरान मेरठ के एसएसपी ने भीड़ हटाने के लिए एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया था. इसके बाद से ही अलग-अलग राजनीतिक दल और संगठन पीड़ित परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं. पुलिस का कहना है कि पीड़ित परिवार पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट है, लेकिन कुछ लोग साजिश करके माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. एसपी के मुताबिक, किसान आंदोलन से जुड़े भारतीय किसान यूनियन अंबेडकर गुट के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी और अन्य राजनीतिक लोग भीड़ इकट्ठा कर दावा कर रहे हैं कि परिवार संतुष्ट नहीं है. इसी आशंका के चलते पुलिस ने पहले मुजफ्फरनगर में भी चंद्रशेखर आजाद को रोका था. मेरठ में भी नाकेबंदी कर दी गई है, ताकि माहौल न बिगड़े.
चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि वे पीड़ित परिवार से संवेदना जताने जा रहे थे. पुलिस का तर्क है कि कलेक्ट्रेट पर पहले हुए प्रदर्शन में झड़प और थप्पड़ कांड के बाद स्थिति तनावपूर्ण है, इसलिए बाहरी नेताओं के आने पर रोक है. फिलहाल पुलिस ने चढ़ावा प्रबंधन की तरह यहां भी सख्ती बढ़ा दी है. प्रशासन का कहना है कि जांच चल रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये कदम जरूरी हैं. हालांकि, मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है.