उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एनडीए गठबंधन के संभावित 'सीट बंटवारे' का एक आंकड़ा जारी कर नई राजनीतिक बहस शुरू कर दी है. अखिलेश ने दावा किया है कि पीडीए के दबाव में आकर बीजेपी अपने सहयोगियों (जैसे आरएलडी को 73, अन्य को 19 और 21 सीटें) को ज्यादा सीटें देने पर मजबूर होगी. राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अखिलेश यादव का यह दांव एनडीए के भीतर दरार पैदा करने और बीजेपी के सहयोगी दलों की महत्वाकांक्षाओं को हवा देने की एक सोची-समझी रणनीति है.
अखिलेश के इस 'सियासी टेस्टर' पर एनडीए के सहयोगियों की प्रतिक्रिया भी तुरंत आई. सुभासपा (SBSP) प्रमुख ओ.पी. राजभर ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एनडीए में सीटों को लेकर कोई झगड़ा नहीं है, अखिलेश को कांग्रेस और अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए. हालांकि, निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद के बयान में एक छिपी हुई टीस नजर आई. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी प्राथमिकता सीटों से ज्यादा निषाद समाज के लिए 'आरक्षण' लागू करवाना है.