सुबह का वक्त था. जयपुर का सेंट्रल पार्क रोज की तरह मॉर्निंग वॉक करने वालों से भरा हुआ था. चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव गुप्ता भी रोजाना की तरह टहलने पार्क पहुंचे थे. उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों में उनकी जिंदगी एक ऐसी फिल्मी कहानी में बदलने वाली है, जिसमें वह पीड़ित भी होंगे, बंधक भी और आखिर में लोगों की नजर में आरोपी भी.