गाजियाबाद: गाजियाबाद में तीन बहनों की सामूहिक आत्महत्या के मामले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है. इस दुखद घटना के बाद पुलिस के हाथ जो सुसाइड नोट लगा है, वह केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उन मासूमों की उस खौफनाक मनोदशा का दस्तावेज है, जिससे वे गुजर रही थीं. फॉरेंसिक और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों ने इस सुसाइड नोट का बारीकी से विश्लेषण किया है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.
हैंडराइटिंग में छिपा था मौत का संकेत?
फॉरेंसिक एक्सपर्ट अमरनाथ मिश्रा के अनुसार, सुसाइड नोट में लिखने का तरीका सामान्य नहीं था. उन्होंने नोट के आधार पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातें बताईं:
नोट में "True Life Story" और "I" जैसे शब्दों को बहुत ही 'डोमिनेंट' (प्रमुख) तरीके से कैपिटल अक्षरों में लिखा गया है. यह दर्शाता है कि लिखने वाली बच्ची उस समय बेहद गंभीर और किसी बात को लेकर बगावती मूड में थी.
शब्दों के नीचे जाने वाली लाइनें (जैसे 'D' और 'R' का झुकाव) यह संकेत देती हैं कि बच्चियों का दिमाग उस समय स्थिर नहीं था, बल्कि विचारों का ज्वार उमड़ रहा था.
नोट के बीच में एक चेहरा बनाया गया है जिसकी आंखों से 'मोटी धार' वाले आंसू गिरते दिखाए गए हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, आमतौर पर लोग ऊपर की ओर मुड़ी हुई भौहें बनाते हैं, लेकिन यहां भौहें नीचे की ओर झुकी हुई हैं, जो गहरी नकारात्मकता और सुसाइडल टेंडेंसी को दर्शाती हैं.
नोट में बार-बार 'Sorry Papa' लिखना यह साबित करता है कि वे जानती थीं कि वे गलत कर रही हैं, लेकिन गेम का जुनून उनके पिता के प्यार पर भारी पड़ गया था.
'डोपामाइन' का जाल और ऑनलाइन गेमिंग की लत
मनोवैज्ञानिक डॉ. कपिल कक्कर ने बताया कि टीनेजर्स (किशोरों) के मस्तिष्क में 'एमिग्डाला' (इमोशनल पार्ट) जल्दी मैच्योर हो जाता है, जबकि 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (सोचने-समझने वाला हिस्सा) पूरी तरह विकसित नहीं होता.
कोरियन लव जैसे गेम्स बच्चों के दिमाग में 'डोपामाइन' रिलीज करते हैं। हर अगला लेवल उन्हें एक 'किक' देता है, जिससे वे आभासी दुनिया को ही सच मान बैठते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि घर में कैद रहने और स्कूल न जाने के कारण इन बच्चियों का सामाजिक दायरा खत्म हो गया था. उनके लिए 'ब्लॉक', 'लाइक' और 'कमेंट' की दुनिया ही असली जिंदगी बन गई थी.