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दिव्यांग महिलाओं और बच्चों के लिए ज़रूरी हैं कोशिशें

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डिसएबिलिटी राइट्स एडवोकेट तथा ज्योतिर्गमय फ़ाउंडेशन की संस्थापक टिफ़ैनी बरार ने दिव्यांग महिलाओं और बच्चों के लिए तुरंत ज़रूरी कोशिशों का ज़िक्र किया, जिनमें क्लस्टर्ड मॉडल अपनाने के स्थान पर सरकारी स्कूलों में बच्चों की ज़रूरतों के मुताबिक रीसोर्स अध्यापक तैनात करना शामिल है. टिफ़ैनी बरार का कहना है कि लोकोमोटिव डिसएबिलिटी, ऑटिज़्म और अन्य दिव्यांगताओं से जूझ रही महिलाओं के लिए रीप्रोडक्टिव हेल्थ तथा मैन्स्ट्रुअल हाईजीन पर एक्सक्लूसिव क्लासें लगाई जानी चाहिए.



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