होर्मुज में चीन ने किया बड़ा खेल, समंदर का सीना चीरकर अमेरिका को डराया, देखते रहे ट्रंप

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  • प्रकाशित: अप्रैल 14, 2026

होर्मुज की नाकेबंदी पर अमेरिका को चीन–रूस की खुली चेतावनी, सहयोगी देश भी बना रहे दूरी
बड़ी अंतरराष्ट्रीय हलचल के संकेत
होर्मुज जलडमरूमध्य की संभावित नाकेबंदी को लेकर वैश्विक राजनीति में तनाव तेज़ हो गया है. इस मुद्दे पर चीन ने अमेरिका को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि वह जहाज़ों की आवाजाही में किसी भी तरह का दखल न दे. चीन का कहना है कि ईरान के साथ उसके व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं और वह अपने हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा.


चीन का सख़्त संदेश
चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ चीन के दीर्घकालिक व्यापार और ऊर्जा करार हैं. उन्होंने कहा कि होर्मुज मार्ग चीन के लिए खुला है और चीनी जहाज़ बिना किसी बाधा के इस क्षेत्र से आ-जा रहे हैं. चीन ने उम्मीद जताई कि अन्य देश उसके आंतरिक और रणनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे.


रूस भी अमेरिका के खिलाफ मुखर
सिर्फ चीन ही नहीं, रूस ने भी होर्मुज की नाकेबंदी को लेकर अमेरिका को सख़्त चेतावनी दी है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि इस जलमार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का वैश्विक बाज़ारों पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ेगा.


पेस्कोव के अनुसार, होर्मुज अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम है और इसमें अस्थिरता पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है.


अमेरिका की कमजोर नब्ज़ और बढ़ती चिंता
ईरान द्वारा होर्मुज को लेकर उठाए गए कदमों के बाद यह मार्ग अब वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है. रूस और चीन खुलकर अमेरिका को चेतावनी देते नज़र आ रहे हैं, जिससे वाशिंगटन की स्थिति और दबाव में दिख रही है.


अमेरिकी सहयोगी भी पीछे हटते नज़र आए
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी देश भी अब इस मुद्दे पर उससे दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं.

ब्रिटेन: प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने साफ कर दिया है कि ब्रिटेन होर्मुज की नाकेबंदी में अमेरिका का साथ नहीं देगा.

कनाडा: कनाडा ने अपने रक्षा बजट का 70% अमेरिका को न देने का फैसला किया है.
फ्रांस: फ्रांस ने भी होर्मुज से जुड़ी किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया है. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शांति मिशन की बात कही है.

इटली: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सैन्य कदमों की बजाय कूटनीति से तनाव कम करने पर ज़ोर दिया है.

एक-एक कर वे देश, जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के मज़बूत साथी बताते रहे थे, अब औपचारिक रूप से या परोक्ष रूप से पीछे हटते नज़र आ रहे हैं.

युद्ध खत्म करने के लिए रूस की बड़ी पहल
इस बीच रूस ने ईरान संकट को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. रूस ने कहा है कि अगर ईरान चाहे तो अपना संवर्धित यूरेनियम रूस को सौंप सकता है. दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, रूस संकट की घड़ी में ईरान की हरसंभव मदद के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव पहले भी दिया गया था और अब भी खुला है, हालांकि इस पर अब तक कोई ठोस बातचीत आगे नहीं बढ़ी है.

अमेरिका की शर्त और आगे की राह
अमेरिका लगातार यह दोहराता रहा है कि जब तक ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाता और उसके एनरिचमेंट प्लांट्स को निष्क्रिय नहीं किया जाता, तब तक वह युद्ध को समाप्त नहीं मानेगा.

अब देखना यह होगा कि क्या ईरान रूस के इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है या नहीं. फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि होर्मुज की नाकेबंदी ने वैश्विक राजनीति को एक नए और संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है.
 

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