Mamata in Lawyer Robes: पहले घर बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, फिर काले कोट में हाईकोर्ट पहुंची ममता, फिर आखिर क्या हुआ

Mamata Banerjee in Lawyer Robes: कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने आज एक अलग ही अंदाज में सियासी और कानूनी मैदान में एंट्री की. ममता बनर्जी कलकत्ता हाई कोर्ट वकील की वर्दी में पहुंचीं और चुनावी हिंसा से जुड़े मामलों में खुद अदालत के सामने दलीलें रखीं. उनकी यह तस्वीर सामने आने के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई.

इससे पहले ममता बनर्जी ने अपने आवास पर एक अहम बैठक बुलाई, जिसमें टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, शत्रुघ्न सिन्हा और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए. बैठक के बाद ममता सीधे कोर्ट पहुंचीं, जहां उन्होंने याचिका पर सुनवाई के दौरान पक्ष रखा.

दरअसल, टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी के बेटे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई हो रही थी. इस मामले में ममता बनर्जी खुद चीफ जस्टिस की अदालत में पेश हुईं और राज्य में कथित चुनावी हिंसा को लेकर बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि “बंगाल कोई बुलडोजर राज्य नहीं है” और आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस की मौजूदगी में टीएमसी से जुड़े लोगों के घर और दफ्तर कब्जाए जा रहे हैं.

ममता बनर्जी ने अदालत में दावा किया कि हिंसा के कारण राज्य में कई लोगों की जान गई है, जिनमें 6 हिंदू समेत 10 लोगों की मौत का जिक्र किया गया. उन्होंने तुरंत सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की. गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी ने खुद अदालत में पैरवी की हो. इससे पहले भी वे सुप्रीम कोर्ट में एक मामले को लेकर दलीलें रख चुकी हैं. करीब 30 साल पहले भी वे वकील के रूप में अदालत में पेश हुई थीं. ममता बनर्जी ने कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की है और कुछ समय तक वकालत भी कर चुकी हैं.

हालांकि, ममता के इस कदम पर विपक्ष ने कड़ा हमला बोला है. बीजेपी और अन्य दलों ने इसे “सियासी नौटंकी” करार देते हुए सवाल उठाए कि जब पहले चुनावी हिंसा हुई थी, तब इस तरह की पहल क्यों नहीं की गई. विपक्ष का आरोप है कि ममता बनर्जी अब राजनीतिक दबाव में कानूनी लड़ाई का सहारा ले रही हैं.
वहीं, टीएमसी का कहना है कि ममता बनर्जी सिर्फ एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक प्रशिक्षित वकील भी हैं और जनता के अधिकारों के लिए हर मंच पर लड़ाई लड़ना उनका कर्तव्य है.

फिलहाल, ममता बनर्जी का कोर्ट में वकील के रूप में उतरना सिर्फ एक कानूनी कदम नहीं, बल्कि एक बड़ा सियासी संदेश भी माना जा रहा है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के आसार हैं.