AIMIM नेता वारिस पठान ने स्पष्ट किया कि वे वंदे मातरम का पूरा आदर और सम्मान करते हैं, लेकिन एक मुसलमान होने के नाते वे इसे पूरा नहीं गा सकते. उनका मानना है कि इसकी कुछ पंक्तियां 'शिर्क' (अल्लाह के अलावा किसी अन्य की पूजा/वंदना करना) के दायरे में आती हैं. उन्होंने कहा कि इस्लाम में केवल अल्लाह की इबादत की अनुमति है. उन्होंने भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें अपने धर्म का पालन करने का पूरा अधिकार है. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट ने राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) को अनिवार्य (मैंडेटरी) नहीं बनाने की बात कही है.