उत्तरकाशी में खीरगंगा नदी का तबाही वाली पुराना है इतिहास, पढ़ें पहले कब आई थी ऐसी तबाही

धराली और आसपास के गांवों में पहले भी तबाही मचाती रही है खीरगंगा नदी. बीते कुछ वर्षों में कई बार इस नदी ने रौद्र रूप दिखाते हुए चेतावनी भी दी थी. लेकिन मंगलवार को जो कुछ हुआ उसके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं था.

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उत्तराखंड में बादल फटने से मची तबाही
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  • 1835 में खीरगंगा नदी ने उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी जिसमें 206 मंदिर ध्वस्त हो गए थे.
  • मंगलवार को खीरगंगा नदी ने धराली गांव को कुछ सेकंड में मलबे में तब्दील कर दिया.
  • खीरगंगा नदी ने पिछले वर्षों में कई बार रौद्र रूप दिखाया था.
उत्तरकाशी:

उत्तरकाशी के धराली में खीरगंगा ने जिस तरह की तबाही मंगलवार को मचाई वो इस तरह की कोई पहली घटना नहीं है. जानकार बताते हैं कि वर्ष 1835 में भी खीरगंगा ने इसी तरह से अपना रौद्र रूप दिखाया था. उस साल भी खीरगंगा ने जमकर तबाही मचाई थी. तबाही ऐसी थी की एक झटके में कई गांव और 206 मंदिर तबाह हो गए थे. 190 साल बाद एक बार फिर धराली में खीरगंगा ने अपना विध्वंसक रूप दिखाया है. मंगलवार को महज कुछ सेकेंड्स में ही धराली गांव मलबे की ढेर में तबदील हो गया है. बताया जा रहा है कि जैसे-जैसे रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ेगा वैसे-वैसे इस इस हादसे में मरने वालों की संख्या में इजाफा भी हो सकता है. 


गंगोत्री हाईवे को भी हुआ नुकसान

धराली में आई इस तबाही का असर गंगोत्री हाईवे पर भी पड़ा है. इस हाईवे का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है. हाईवे के हिस्से के क्षतिग्रस्त होने से धराली तक पहुंच पाने में राहत और बचाव दल को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हाईवे के क्षतिग्रस्त होने के कारण ही डीएम औऱ एसपी भी घटनास्थल तक सड़क के रास्ते से नहीं पहुंच पाए.