- कानपुर के कठेठा गांव में 15 वर्षीय प्रतीक की हत्या के मामले का पुलिस ने 24 घंटे में खुलासा किया
- हत्या का आरोपी प्रतीक का मामा आशुतोष था, जिसने एकतरफा प्यार के कारण हत्या की योजना बनाई
- आशुतोष को प्रतीक ने अपनी बहन को प्रपोज करते देख लिया था, जिससे उसके पिता ने उसे फटकार लगाई
कानपुर के घाटमपुर थाना क्षेत्र में आने वाले कठेठा गांव में 15 साल के एक किशोर की हत्या की गुत्थी सुलझ गई है. पुलिस ने 24 घंटे के भीतर ही इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया है. 15 साल के उस लड़के की हत्या का आरोपी और कोई नहीं, बल्कि रिश्ते में लगने वाला उसका मामा ही निकला. हत्या की वजह एकतरफा प्यार और उसमें पैदा हो रही बाधा बनी. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
दरअसल, कठेठा गांव के रहने वाले संतोष सिंह का 15 साल का बेटा प्रतीक उर्फ कृष्णा शनिवार को लापता हो गया था. बाद में उसका शव खेत के पास बनी एक नहर के किनारे मिला था. उसकी हत्या उसके ही लोअर के नाड़े से गला घोंटकर की गई थी. इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी. पुलिस ने जब छानबीन शुरू की तो कड़ियां जुड़ती गईं और आखिरकार आरोपी आशुतोष पुलिस के हत्थे चढ़ गया.
हत्या की वजह क्या रही?
डीसीपी साउथ दीपेंद्रनाथ चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरोपी आशुतोष मृतक किशोर की बहन से एकतरफा प्यार करता था. कुछ समय पहले प्रतीक ने आशुतोष को अपनी बहन को प्रपोज करते देख लिया था और इसकी शिकायत अपने परिजनों से कर दी थी. शिकायत के बाद आशुतोष के पिता ने उसे कड़ी फटकार लगाई थी. इसी बात से खुन्नस खाया आशुतोष प्रतीक को अपने रास्ते का कांटा मानने लगा था. उसे लगा कि जब तक प्रतीक है, वह उसकी बहन के करीब नहीं जा पाएगा.
आरोपी ने ऐसे दिया वारदात को अंजाम
शनिवार दोपहर आरोपी ने प्रतीक को उस समय निशाना बनाया जब वह घर के बाहर अकेला था. आशुतोष ने मवेशी भगाने के बहाने उसे खेत पर बुलाया. सुनसान जगह पाकर उसने प्रतीक पर हमला कर दिया. आरोपी ने पहले उसका गला दबाया, और जब किशोर चिल्लाने लगा तो उसके मुंह में रुमाल ठूंस दिया. इसके बाद प्रतीक के ही लोअर का नाड़ा निकालकर उसका गला तब तक कसा जब तक उसकी सांसें नहीं थम गईं. हत्या के बाद आरोपी ने शव को नहर किनारे में फेंक दिया.
गांव से भागा लेकिन वापस लौट आया
आरोपी कितना शातिर था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हत्या करने के बाद वह कुछ समय के लिए गांव से भागा, लेकिन शक से बचने के लिए वापस लौट आया. वह जांच के दौरान पुलिस के सामने ही घूमता रहा. यहां तक कि वह फॉरेंसिक टीम को अपनी बाइक पर बिठाकर घटनास्थल तक ले गया और पुलिस की हर गतिविधि पर नजर रखता रहा ताकि उसे पता चल सके कि जांच किस दिशा में जा रही है.
पुलिस ने जब गांव वालों से पूछताछ की, तो पता चला कि आखिरी बार प्रतीक को आशुतोष के साथ देखा गया था. शुरुआत में आशुतोष मुकरता रहा, लेकिन जब पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाली और सख्ती से पूछताछ की, तो वह टूट गया और अपना जुर्म कबूल कर लिया.














