- BJP सांसद करन भूषण सिंह ने कहा कि वे UGC स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं लेकिन नियम निर्माण में उनका योगदान नहीं
- करन भूषण सिंह ने यूजीसी से अपील की है कि वह अपने नए नियमों पर पुनर्विचार करे और जनभावना का सम्मान करे
- पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने यूजीसी नियमों के विरोध में वीडियो जारी कर सरकार से कानून वापस लेने की मांग की
देश में यूजीसी के नए नियमों को लेकर विरोध तेज हो चुका है. इस बीच गोंडा जिले से कैसरगंज के भाजपा सांसद करन भूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि वे यूजीसी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं, लेकिन बिल/नियम निर्माण में उनका कोई योगदान नहीं रहा. उन्होंने कहा कि उनकी भावना अपने समाज के लिए है और यूजीसी से अपील है कि वह अपने नियम पर पुनर्विचार करे तथा जनभावना का सम्मान करे.
करन भूषण सिंह के पिता बृजभूषण शरण सिंह ने क्या कहा
सांसद के बयान के समानांतर, उनके पिता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी सोशल मीडिया पर यूजीसी नियमों के विरोध में वीडियो साझा किया है. वीडियो में उन्होंने मांग की कि सरकार इस कानून को वापस ले, क्योंकि इससे समाज में टूटने की स्थिति उत्पन्न होगी. उन्होंने कहा कि अधिकारी कमरों में बैठकर क़ानून बनाते हैं, और यदि ज़रूरत पड़ी तो आंदोलन किया जाएगा. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.
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सांसद करन भूषण सिंह ने कहा कि मैं इस स्टैंडिंग कमेटी का सदस्य हूं, लेकिन इस बिल/नियमों के निर्माण में मेरा कोई योगदान नहीं है. मेरी भावना अपने समाज के लिए है. हमारी मांग है कि यूजीसी अपने इस नियम पर पुनः विचार करे और जनभावना का सम्मान करे.
(सांसद को यूजीसी बिल के आने के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने की घटनाएं भी सामने आईं, जिसके बाद उन्होंने यह स्पष्टिकरण पोस्ट किया.)
बृजभूषण शरण सिंह का वीडियो संदेश—‘यह कानून समाज को बांटेगा'
गोंडा के विष्णोहरपुर स्थित अपने पैतृक आवास में बच्चों के साथ खेलते हुए साझा किए गए वीडियो में उन्होंने कहा कि समाज कैसे चलता है, यह ऑफिस में बैठकर तय नहीं किया जा सकता. गांवों में देखिए, बिना भेदभाव, बिना जातीय रंग के बच्चे एक साथ खेलते हैं; कोई किसी से जात नहीं पूछता. क्या आप चाहते हैं कि भविष्य में विघटन पैदा हो?
जरूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे
ऐसा माहौल खड़ा किया जा रहा है. जो गलती क्षमा योग्य नहीं है, उसके लिए सजा दीजिए, इसमें कोई विरोध नहीं. लेकिन यह कानून समाज में टकराव पैदा करेगा. पहले भी दलित उत्पीड़न, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और दहेज जैसे मामलों में कानून बने, क्या अत्याचार रुक गया? दुरुपयोग ज्यादा होता है, कानूनों की समीक्षा होनी चाहिए. अब क्या बच्चे जात देखकर दोस्ती करेंगे? मैं इस क़ानून के पूर्णतः विरोध में हूं, जरूरत पड़ी तो आंदोलन करेंगे.
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कहां तक कानून बनाएंगे?
उन्होंने आगे सवर्ण, ओबीसी और दलित समाज के समझदार लोगों से संपर्क कर कानून के विरोध में एकजुट होने की अपील की. उनके शब्दों में गांव साथ रहता है, शादी‑ब्याह से लेकर हर नेग‑भागीदारी तक. यह हमारी सनातन परंपरा है, इसे कानून से नहीं बांटा जा सकता. बृजभूषण शरण सिंह ने यह भी कहा कि “सवर्ण‑सवर्ण, दलित‑दलित के बीच भी झगड़े होते हैं. कहां तक कानून बनाएंगे? बेहतर है भाईचारा स्थापित कीजिए, वरना देश और समाज को बड़ा नुकसान होगा.
सोशल मीडिया पर असर और अगला कदम
इस मुद्दे पर दोनों नेताओं की सार्वजनिक आपत्तियां सामने आने के बाद ऑनलाइन बहस तेज हो गई है. करन भूषण सिंह ने नियम‑निर्माण में भूमिका से दूरी बनाने के साथ पुनर्विचार की अपील की है, जबकि बृजभूषण शरण सिंह ने क़ानून वापसी की मांग रखते हुए कहा है कि ज़रूरत पड़ी तो आंदोलन होगा. सामाजिक स्तर पर, समर्थक और विपक्षी, दोनों पक्षों के वीडियो/पोस्ट साझा किए जा रहे हैं, और स्थानीय स्तर पर जनभावनाओं की प्रतिक्रिया तेज है.













