भारत के तमाम शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव और बराबरी को लेकर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी यूजीसी की तरफ से कुछ सख्त नियम लागू किए गए हैं. इसमें एससी-एसटी के अलावा ओबीसी छात्रों को भी शामिल किया गया है, जिनकी शिकायत पर कॉलेज या यूनिवर्सिटी की कमेटी को तुरंत एक्शन लेना होगा. इन नए नियमों का जनरल कैटेगरी के छात्र और सवर्ण संगठन विरोध कर रहे हैं. इसी बीच आज हम आपको बताएंगे कि अमेरिका मे जातिगत भेदभाव को लेकर क्या कानून है और स्कूल-कॉलेज में ऐसा करने पर क्या सजा मिलती है.
अमेरिका में क्या है कानून?
अमेरिका के कैलिफोर्निया में जातिगत भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून 2023 में लागू किया गया. ये अमेरिका का पहला राज्य बन गया, जहां ऐसा कोई कानून लाया गया. जाति आधारित भेदभाव पर रोक लगाने के लिए ऐसा किया गया. बताया गया कि ये कानून एशियाई मूल के उन लोगों की सुरक्षा के लिए बनाया गया, जो लगातार आरोप लगा रहे थे कि उनसे साथ जाति के चलते गलत व्यवहार किया गया है.
इसे लेकर तत्कालीनी सीनेटर वहाब ने कहा था कि ये विधेयक मानवाधिकारों की सुरक्षा और समानता के लिए है. उन्होंने कहा कि हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कैलिफोर्निया में हर व्यक्ति सुरक्षित महसूस करे, फिर चाहे उसका बैकग्राउंड कुछ भी हो.
कॉलेज यूनिवर्सिटी में क्या नियम?
अमेरिका के स्कूलों और बाकी शैक्षणिक संस्थानों में नागरिक अधिकार कानून लागू होते हैं, शिक्षा विभाग की तरफ से इन्हें लागू किया जाता है. यहां के
संघीय शिक्षा विभाग (Department of Education) में एक नागरिक अधिकार कार्यालय (OCR) है, जहां ये सारे मामले देखे जाते हैं. इसके अलावा बॉय स्काउट्स ऑफ अमेरिका इक्वल एक्सेस एक्ट (BSAEAA) को भी लागू किया जाता है. जो 'नो चाइल्ड लेफ्ट बिहाइंड एक्ट 2001' का एक हिस्सा है.
नस्लभेद को लेकर भी सख्ती
अमेरिका में पिछले कई सालों से नस्लभेद के मामले सामने आते हैं, जिनमें रंग के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव किया जाता है. यही वजह है कि कुछ साल पहले कैलिफोर्निया के क्यूपर्टिनो में कम से कम 30 स्कूलों ने सुझाव दिया कि छात्रों को 'नॉट माई आइडिया' नामक की किताब पढ़नी चाहिए, जिसमें नस्लवाद को श्वेत लोगों की समस्या बताया गया है और कहा गया है कि हम सभी इसमें फंसे हुए हैं. कुछ साल पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि यूनिवर्सिटी में दाखिले के दौरान नस्ल पर विचार नहीं किया जाएगा. यानी रंग के आधार पर एडमिशन नहीं दिए जाएंगे.
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