नोएडा हिंसा मामले में बड़ा खुलासा: सॉफ्टवेयर इंजीनियर निकला मास्टरमाइंड, तमिलनाडु से किया गया था गिरफ्तार

घटना के बाद से ही पुलिस आदित्य आनंद की तलाश में जुटी थी. 16 अप्रैल को कोर्ट ने उसके खिलाफ वारंट जारी किया था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था. पहले वह चेन्नई पहुंचा और वहां से तिरुचिरापल्ली जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन STF ने उसके मूवमेंट पर नजर रखते हुए उसे रेलवे स्टेशन से ही दबोच लिया.

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तमिनलाडु से गिरफ्तार हुआ आरोपी
NDTV

नोएडा में 13 अप्रैल 2026 को हुए हिंसक बवाल को लेकर अब बड़ा खुलासा हुआ है. मजदूर आंदोलन की आड़ में हुई इस हिंसा, आगजनी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की साजिश के पीछे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की साजिश थी. यूपी STF ने इस मामले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल आदित्य आनंद उर्फ रॉकी को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी 18 अप्रैल की देर रात करीब 1:40 बजे की गई, जब आरोपी कहीं और भागने की फिराक में था. STF की नोएडा यूनिट को इस पूरे मामले की जांच सौंपी गई थी, जिसके बाद लगातार इनपुट जुटाकर इस बड़े आरोपी तक पहुंच बनाई गई.

दरअसल, 13 अप्रैल को गौतमबुद्धनगर में मजदूर आंदोलन के नाम पर अचानक हालात बिगड़ गए थे. प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें आगजनी की गई और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस की शुरुआती जांच में ही साफ हो गया था कि यह सब अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी.जांच के दौरान STF को पता चला कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आदित्य आनंद की अहम भूमिका थी. वह नोएडा के सेक्टर-37 में रह रहा था और अलग-अलग संगठनों से जुड़े लोगों के संपर्क में था.

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच कुछ संगठनों के सदस्यों ने मिलकर इस हिंसा की पूरी प्लानिंग की थी. मजदूर बिगुल, दिशा स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन, आरडब्ल्यूपीआई, नौजवान भारत सभा और एकता संघर्ष समिति जैसे संगठनों के कुछ लोगों के बीच बैठकें हुईं, जिसमें मजदूर आंदोलन के नाम पर हिंसा फैलाने की रणनीति बनाई गई.

घटना के बाद से ही पुलिस आदित्य आनंद की तलाश में जुटी थी. 16 अप्रैल को कोर्ट ने उसके खिलाफ वारंट जारी किया था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था. पहले वह चेन्नई पहुंचा और वहां से तिरुचिरापल्ली जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन STF ने उसके मूवमेंट पर नजर रखते हुए उसे रेलवे स्टेशन से ही दबोच लिया.अगर आरोपी की पर्सनल प्रोफाइल की बात करें तो आदित्य आनंद बिहार के हाजीपुर का रहने वाला है और उसकी उम्र करीब 28 साल है. उसने NIT जमशेदपुर से बीटेक किया है और पढ़ाई में अच्छा माना जाता था. पढ़ाई के बाद उसे Genpact कंपनी में नौकरी मिल गई, जहां वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा था.

साल 2022 में वह गुरुग्राम शिफ्ट हो गया और बाद में नोएडा आकर रहने लगा. इसी दौरान वह सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक के जरिए कुछ संगठनों के संपर्क में आया. शुरुआत में वह मजदूरों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करने लगा, लेकिन धीरे-धीरे इन संगठनों की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हो गया.जांच में यह भी सामने आया है कि वह मजदूर बिगुल से जुड़ा हुआ था और उसके संपादक अनुभव सिन्हा समेत कई लोगों के संपर्क में था. इसके अलावा वह दिशा स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन, आरडब्ल्यूपीआई (भारतीय क्रांतिकारी मजदूर पार्टी), नौजवान भारत सभा और एकता संघर्ष समिति जैसे संगठनों के लोगों से भी जुड़ा हुआ था.

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पुलिस का कहना है कि इन नेटवर्क्स के जरिए ही वह धीरे-धीरे बड़े स्तर की साजिश का हिस्सा बना. STF अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और फंडिंग या लॉजिस्टिक सपोर्ट कहां से आया.फिलहाल आदित्य आनंद को तमिलनाडु में कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर लेने की प्रक्रिया चल रही है. इसके बाद उसे गौतमबुद्धनगर लाया जाएगा, जहां उससे और गहन पूछताछ की जाएगी.पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ एक स्थानीय हिंसा का नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है. आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है.

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