मिलिट्री इंटेलीजेंस ने दबोचा शातिर ठग, घरवाले भी समझते थे अफसर; AI से बनाई गन और ऑफिस फोटो 

कानपुर में मिलिट्री इंटेलिजेंस और पुलिस ने सेना का फर्जी अफसर बनकर युवाओं से लाखों की ठगी करने वाले शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी AI तकनीक से गन, वर्दी और ऑफिस की तस्वीरें बनाकर खुद को नायब सूबेदार बताता था.

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Fake Army Officer Arrested: कानपुर में मिलिट्री इंटेलिजेंस और पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसने खुद को भारतीय सेना का अफसर बताकर सैकड़ों युवाओं को ठग लिया. हैरानी की बात यह है कि उसकी सच्चाई से सिर्फ पीड़ित ही नहीं, बल्कि उसका अपना परिवार और गांव वाले भी अनजान थे. आरोपी ने AI तकनीक की मदद से ऐसी तस्वीरें और दस्तावेज तैयार किए थे, जिनसे वह खुद को सेना का नायब सूबेदार साबित करता रहा.

संयुक्त ऑपरेशन में पकड़ा गया फर्जी अफसर

मिलिट्री इंटेलिजेंस और चकेरी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कानपुर से आरोपी को गिरफ्तार किया. वह खुद को भारतीय सेना में नायब सूबेदार बताता था और युवाओं को स्पोर्ट्स कोटे से भर्ती कराने का झांसा देता था. जांच में सामने आया कि वह पूरी तरह फर्जी है और सेना से उसका कोई लेना‑देना नहीं है.

परिवार और गांव वालों को भी नहीं थी भनक

आरोपी ने अपनी झूठी पहचान इतनी मजबूत बना रखी थी कि उसके घरवाले, रिश्तेदार और गांव के लोग भी उसे सेना का अफसर मानते थे. वह वर्दी पहनकर तस्वीरें खिंचवाता, फर्जी आईडी दिखाता और सेना से जुड़ी बातें ऐसे करता था कि किसी को शक ही नहीं होता था.

AI से बनाई वर्दी, गन और ऑफिस की तस्वीरें

एडीसीपी ईस्ट अंजलि विश्वकर्मा के मुताबिक, आरोपी की पहचान शिवम यादव उर्फ कुणाल सिंह यादव निवासी गोरखपुर के रूप में हुई है. पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सेना की वर्दी, हथियार और ऑफिस जैसी तस्वीरें तैयार की थीं. उसके पास न तो कोई गन थी और न ही ऐसा कोई दफ्तर, लेकिन उसने AI इमेज के जरिए लोगों को भ्रम में रखा.

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भर्ती का सपना टूटा, ठगी का रास्ता चुना

शिवम खुद एक स्टेट लेवल रेसलर रह चुका है. वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था, लेकिन चयन नहीं हो सका. इसके बाद उसने गलत रास्ता अपनाया. वह युवाओं से कहता था कि उसकी ऊंची पहुंच है और वह उन्हें स्पोर्ट्स कोटे से सेना में भर्ती करा देगा.

लाखों रुपये वसूलता था आरोपी

आरोपी पहले रेसलिंग एसोसिएशन के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर 10 से 20 हजार रुपये लेता था. इसके बाद अंतिम चयन और नौकरी लगवाने के नाम पर 6 से 10 लाख रुपये तक की मांग करता था. जांच में सामने आया है कि अब तक वह सैकड़ों युवाओं से ठगी कर चुका है.

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MI के शक के बाद खुली पोल

मिलिट्री इंटेलिजेंस को सूचना मिली थी कि चकेरी इलाके में कोई व्यक्ति खुद को नायब सूबेदार बताकर पैसे ले रहा है. जब MI ने सेना के रिकॉर्ड की जांच की, तो इस नाम का कोई भी अधिकारी नहीं मिला. इसके बाद पुलिस के साथ मिलकर शनिवार को नौबस्ता अंडरपास के पास से उसे दबोच लिया गया. आरोपी फर्जी आईडी कार्ड का इस्तेमाल कर सैन्य कैंट इलाके में भी घुस जाता था. इससे वह युवाओं के सामने अपनी बात और मजबूत कर देता था, ताकि वे उस पर पूरी तरह भरोसा कर लें.

भारी मात्रा में फर्जी सामान बरामद

पुलिस ने आरोपी के पास से सेना की फर्जी वर्दी, फर्जी आईडी कार्ड, कैंटीन और डिपेंडेंट कार्ड, चार फर्जी मोहरें और इंक पैड, छह एटीएम कार्ड, पासबुक, पैन कार्ड, पीली धातु के मेडल, कमांड बैज और बड़ी संख्या में फोटो बरामद किए हैं. चकेरी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया है. कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया है. पुलिस अब ठगी का शिकार हुए युवाओं की पहचान कर रही है और उन बैंक खातों की जांच की जा रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी.

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