Design Linked Incentive Scheme: डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य घरेलू कंपनियों, स्टार्टअप्स और MSMEs को सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचा सहायता प्रदान करना है. इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित यह योजना स्वदेशी चिप्स के विकास को बढ़ावा देती है और 'मेक इन इंडिया' को मजबूत करती है. चलिए आपको बताते हैं सरकार की डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना क्या है? इससे कैसे Startups और MSMEs को फायदा मिल रहा है.
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क्या है Design Linked Incentive Scheme क्या?
DLI योजना केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा Semicon India Programme के तहत चलाया जाता है. इसका उद्देश्य देश में बने सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन को बढ़ावा देना है. इसके तहत सरकार स्टार्टअप्स और MSMEs को पैसों की मदद और उन्नत डिजाइन टूल्स या इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराती है.
Design Linked Incentive Scheme उद्देश्य क्या है?
DLI योजना का मकसद भारत में एक ऐसा चिप डिजाइन इकोसिस्टम बनाना है, जो वैश्विक लेवल पर प्रतिस्पर्धी हो और देश को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सके. इसमें खास ध्यान fabless semiconductor design पर है. Fabless चिप यानी सेमीकंडक्टर चिप्स को डिजाइन और डेवलप तो अपनी कंपनी करती है, लेकिन उनका निर्माण (fabrication) किसी दूसरी बड़ी, खास तकनीक वाली फैक्ट्री में कराया जाता है यानी कंपनी के पास खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं होती.
DLI Scheme की जरूरत क्यों पड़ी?Fabless सेमीकंडक्टर कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं, क्योंकि एक चिप की कुल कीमत में डिजाइन और IP (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) का सबसे बड़ा योगदान होता है. यह कुल 50% तक वैल्यू एडिशन करता है और 30–35% वैश्विक सेमीकंडक्टर बिक्री इन्हीं कंपनियों से आती है. चिप का परफॉर्मेंस, सुरक्षा, ऊर्जा बचत और उसकी गुणवत्ता. सब कुछ डिजाइन और IP पर निर्भर करता है. ऐसे में अगर किसी देश के पास अपना स्थानीय (indigenous) डिजाइन कौशल नहीं है, तो वह मैन्युफैक्चरिंग होने के बावजूद भी बाहरी देशों की टेक्नोलॉजी पर निर्भर रहता है. इसी कमी को पूरा करने के लिए भारत ने DLI Scheme शुरू की, ताकि देश में एक मजबूत फैब्लेस चिप डिजाइन इकोसिस्टम बनाया जा सके.
- स्टार्टअप्स- DPIIT की 2019 की अधिसूचना के अनुसार
- MSMEs- MSME की 2020 की अधिसूचना के अनुसार
- घरेलू कंपनियां- जिनमें मालिकाना हक भारतीय नागरिकों के पास हो और जो FDI नीति (2017) या मौजूदा नियमों के अनुसार हों














